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ऑपरेशन ब्लू स्टार का वो रिक्शावाला, जो आज है पीएम मोदी का दाहिना हाथ

Wed, 06 Jun 2018 02:16 PM IST
ऋतुराज त्रिपाठी, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ऑपरेशन ब्लू स्टार का नाम जेहन में आते ही एक खौफनाक तस्वीर आंखों के सामने तैरने लगती है। वो 6 जून 1984 का दिन था जब अमृतसर(पंजाब) के स्वर्ण मंदिर में की गई भारतीय सेना की कार्रवाई को दुनिया ने 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' के नाम से जाना था। बता दें कि आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 34वीं बरसी है।  

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यह ऑपरेशन भारतीय सेना द्वारा 3 से 6 जून तक चलाया गया था जिसका मकसद अमृतसर(पंजाब) में हरिमंदिर साहिब परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराना था। भिंडरावाले के नेतृत्व में अलगाववादी ताकतों को पाकिस्तान से लगातार समर्थन मिल रहा था।

शुरुआत 31 मई 1984 की शाम को हुई थी जब मेरठ में नाइन इंफेंट्री डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल कुलदीप बुलबुल बराड़ अपनी पत्नी के साथ दिल्ली जाने वाले थे, अगले दिन उन्हें छुट्टियां मनाने के लिए मनीला के लिए निकलना था लेकिन उस वक्त पंजाब में लोगों के दिलों में अलगाववाद की चिंगारी जल रही थी। पंजाब को भारत से अलग कर खालिस्तान बनाने की मांग तेजी से जोर पकड़ रही थी।
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गलियों में आवाजें सुनाई पड़ रही थीं- पंजाब को भारत से अलग करने के लिए सशस्त्र संघर्ष के लिए तैयार रहें। ऐसे में ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम देने के लिए कमांडर मेजर जनरल कुलदीप बुलबुल बराड़ को कमान सौंपी गई थी। बराड़ की छुट्टियां रद्द कर दी गईं और आलाकमान द्वारा उन्हें फौरन अमृतसर पहुंचने का हुक्म दिया गया था। 

सेना ने आतंकियों से कैसे आजाद करवाया था स्वर्ण मंदिर

3 जून 1984 को हजारों भक्त गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस मनाने के लिए अमृतसर पहुंचने वाले थे। भारतीय सेना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वर्ण मंदिर को पूरी तरह से घेर लिया था और शाम होते ही पूरे शहर में कर्फ़्यू लगा दिया गया था।

4 जून को सेना ने मंदिर में छुपे आतंकियों की स्थिति जानने के लिए गोलीबारी शुरू कर दी थी जिसके बाद 5 जून को आतंकियों और सेना में भीषण भिड़त हुई। चारों तरफ गोलियों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। भारत सरकार के मुताबिक इस भिड़ंत में 83 सैनिक शहीद हुए थे और 249 घायल हुए थे।

इस भीषण तबाही में 493 आतंकी मारे गए थे और 86 घायल हुए थे। गिरफ्तार किये गए आतंकियों की संख्या 1592 थी। हालांकि यह आंकड़ें विवादित हैं। इस घटना के बाद सिख समुदाय इंदिरा गांधी की सरकार से नाराज हो गया क्योंकि गोलियां स्वर्ण मंदिर पर भी चली थीं। इस घटना से आहत सिखों की धार्मिक भावनाओं का दुखद परिणाम 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गाँधी की हत्या के रूप में सामने आया था।
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फौजियों के कमरे में घुसकर रिक्शेवाले ने कहा था- हाय..आई एम..

ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए एक कमरे में सेना के अधिकारियों के बीच मीटिंग चल रही थी तभी एक छोटे कद का रिक्शेवाला उस कमरे में घुसता है और आतंकियों के खिलाफ इकट्ठा की गई इनफॉरमेशन देकर जासूसी का दुनिया का सरताज बन जाता है।

यह शख्स रिक्शे वाला बनकर कई महीनों से आतंकियों के बीच में रह रहा था और उसे पूरी जानकारी थी कि आतंकियों के पास किस हद तक नुकसान पहुंचाने वाले हथियार हैं। इस शख्स ने एक पाकिस्तानी जासूस की भूमिका में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ से पहले खालिस्तानी आतंकवादियों से अहम जानकारियां इकट्ठा कर ली थीं।

भारत के पास है रियल लाइफ का जेम्स बॉन्ड
आपने हॉलीवुड के मशहूर किरदार जेम्स बॉन्ड(007) का नाम तो सुना ही होगा। उन्हें रील लाइफ में जासूसी की दुनिया का बेताज बादशाह माना जाता है। वहीं अगर रियल लाइफ के किरदार की बात करें तो एक जेम्स बॉन्ड भारत में भी हुआ है जिसने ऑपरेशन ब्लू स्टार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह भारतीय जेम्स बॉन्ड न ही कारों के ऊपर दौड़ता है और न हसीनाओं से फ्लर्ट करता है लेकिन अपनी हिम्मत और दिमाग से जासूसी की दुनिया का बादशाह बन चुका है। 

ऑपरेशन ब्लू स्टार में अहम भूमिका निभाने वाले इस शख्स का नाम अजीत डोवाल था जो वर्तमान में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और पीएम मोदी के दाहिने हाथ माने जाते हैं। डोवाल 1968 बैच के IPS ऑफिसर हैं और उन्होंने अर्थशास्त्र में मास्टर्स डिग्री हासिल की है।

नौकरी के दौरान केवल 7 साल पहनी पुलिस की वर्दी
हैरान करने वाली बात है कि डोवाल ने अपनी नौकरी के दौरान केवल 7 साल ही वर्दी पहनी क्योंकि वह अपने खुफिया मिशन के लिए ज्यादातर देश से बाहर रहे हैं। उन्होंने अपनी नौकरी शुरू करने के 4 साल बाद 1972 में आईबी ज्वाइन कर लिया था। उन्हें 1988 में भारत के सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया है। 

डोवाल कई और महत्वपूर्ण मिशन पर भी कामयाब रहे हैं। वह पंजाब, मिजोरम, और कश्मीर में चल रहे उग्रवाद विरोधी अभियान में शामिल थे। 1999 में जब कंधार में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 का अपहरण किया गया था तो भारत के मुख्य वार्ताकार अजीत डोवाल ही थे। उन्होंने जून 2014 में आईएसआईएस के कब्जे से 46 भारतीय नर्सों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

7 साल पाकिस्तान में मुसलमान बनकर रहे
कश्मीर में कुक्के पैरे जैसे कट्टर कश्मीरी आतंकवादी को मनाकर डोवाल ने शांति का संदेश दिया था। इसके अलावा उनके बारे में खास बात यह है कि वह सात साल तक वह पाकिस्तान में मुसलमान बनकर रहे और किसी को भनक नहीं लगने दी कि वह एक भारतीय जासूस हैं।  

डोवाल को काम करने के बाद लगता है डर
अपने जासूसी करनामों से दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले डोवाल से जब पूछा गया कि क्या आपको डर नहीं लगता? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था 'डर दो तरह के होते हैं..एक काम करने से पहले का डर और दूसरा काम खत्म करने के बाद का डर। मुझे काम खत्म करने के बाद डर लगता है, जो मैंने सोचा, अगर ऐसा न होता तो फिर क्या होता।' 
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