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गुलामी वाले श्रम कानूनों के लिए बदनाम है कतर, दुनियाभर के आतंकी समूहों को पनाह देने का आरोप

Tue, 06 Jun 2017 03:59 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
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अरब देशों के गठबंधन में उस समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिला जब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिश्र ने पडोसी मुल्क कतर से तमाम संबंध तोड़ने का ऐलान कर दिया। चारों देशों ने कतर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए अपने अपने राजनयिकों को भी वापस बुलाने का फरमान जारी कर दिया है।
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इसके अलावा चारों देशों में रह रहे कतर के नागरिकों से वापस अपने देश लौटने और कतर में रह रहे अपने नागरिकों को 15 दिन में वापिस आने का आदेश जारी कर दिया गया है। अरब गठबंधन के चार महत्वपूर्ण देशों द्वारा आनन फानन में की गई इस कार्रवाई के बाद सवाल खड़ा हो गया है आखिर क्या कतर के हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि क्षेत्रीय देशों को उसके ‌खिलाफ इतनी कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा?

ऐसे में सवाल ये भी खड़ा हो गया है कि अरब देशों के बाद क्या बाकी दुनिया के देश भी कतर के खिलाफ ऐसे कदम उठा सकते हैं, क्योंकि पिछले कुछ समय से अमेरिका लगातार कतर पर सवाल खड़े करता रहा है और उसके खिलाफ प्रतिबंध की चेतावनी तक दे चुका है। जानकारों की मानें तो पिछले कुछ सालों में कतर के हालात लगातार बिगड़े हैं जिसका असर उसकी छवि पर भी पड़ा है। मौजूदा प्रतिबंधों का असर कतर में 2022 में होने वाले फुटबाल विश्व कप पर भी पड़ सकता है, जिसको लेकर कतर काफी उत्साहित है।
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गुलामी वाले श्रम कानूनों के लिए बदनाम है कतर

लगभग 26 लाख की आबादी वाला कतर अपने श्रम कानून कफाला को लेकर काफी बदनाम रहा है। जिसे गुलामी का कानून भी कहा जाता है। कफाला कानून के तहत नौकरी देने वाले नियोक्ता को उक्त श्रमिक के जीवन को नियंत्रित करने के अधिकारी भी मिल जाते हैं।

कतर की लगभग 70 फीसदी आबादी प्रवासियों की है जो बेहतर रोजगार की तलाश में तेल समृद्ध देश में खिंचे चले आते हैं। उनमें भी सबसे ज्यादा संख्या भारतीय कामगारों की हैं। हालांकि कहा जाता है कि ये सब यहां गुलामों जैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। काफला कानून के तहत बिना अपने नियोक्ता की मंजूरी के कोई भी श्रमिक नौकरी नहीं बदल सकता, ऐसा करने पर उसे जेल भेज दिया जाता है या बड़ा जुर्माना भरना पड़ता है।

कतर में विदेशी श्रमिकों के लिए ज्यादातर ठेकेदारी प्रथा ही है, बाहर से आने वाले लोग इन ठेकेदारों के जरिए ही कतर की कंपनियों या संस्‍थाओं में काम पाते हैं। सबसे बड़ी विडंबना ये है ‌कि कोई श्रमिक अगर काम छोड़कर वापस अपने मुल्क जाना चाहे तो उसे बिना कंपनी की अनुमति के देश छोड़ने की अनुमति नहीं मिलती। बल्कि ऐसा करने वालों को उल्टे सीधे आरोप लगाकर आपराधिक मामलों में जेल भेज दिया जाता है।

श्रम कानूनों का ऐसा खुला उल्लंघन कतर सरकार की निगाहों के सामने होता था और सरकार मौन साधे रहती थी। हालांकि दुनियाभर में आलोचनाओं और दबाव के बाद कतर ने कफाला सिस्टम को खत्म कर दिया है। उसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि कतर में साल 2022 में फुटबाल वर्ल्ड कप का आयोजन होना है और उसके लिए होने वाले स्टेडियमों के निर्माण में श्रमिकों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। 

दुनियाभर के प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को अपने यहां पनाह देता है कतर

श्रमिकों के शोषण के अलावा कतर जिस मुद्दे को लेकर पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा घिर रहा है वो है आतंकवाद को बढ़ावा देने का। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिश्र ने इन्हीं आरोपों के तहत कतर से अपने संबंध समाप्त किए हैं। इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि कतर कुछ आतंकी संगठनों के प्रति नरम रवैया रखता है।

मसलन, उसने अफगान तालिबान को साल 2013 में अपने यहां दफ्तर खोलने की अनुमति दे दी। फलस्तीन के प्रतिबंधित संगठन हमास के प्रमुख खालिद मेशाल को कतर ने अपने यहां शरण दी और मिश्र के प्रतिबंधित दल मुस्लिम ब्रदरहुड के पक्ष में भी कतर अधिकतर मौकों पर खड़ा नजर आता है। 

इसके अलावा सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध में भी उस पर विद्रोहियों को समर्थन देने का आरोप लगता रहा है। हाल ही में कतर उस समय फंसता नजर आया जब उसकी सरकारी न्यूज एजेंसी की वेबसाइट पर सऊदी अरब और मिश्र के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। इस पर भड़के मिश्र और सऊदी अरब ने उसकी वेबसाइट पर प्रतिबंध लगा दिया। 
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राजकुमारी पर लगे थे 7 पुरुषों से संबंध बनाने के आरोप

कुछ दिन पहले ही ब्रिटेन से आई एक खबर ने पूरी दुनिया को चौंका कर रख दिया था। ब्रिटेन के अखबार फाइनेंसियल टाइम्स ने अपनी एक खबर को रुकवाने के एवज में कतर के एक राजनयिक पर 5 करोड़ डॉलर की रिश्वत की पेशकश का आरोप लगाया था। वो खबर जुड़ी थी कतर की राजकुमारी सलवा के सामूहिक सेक्स संबंध बनाने की।

जिसमें राजकुमारी सवाल ने सेक्स का चरम सुख पाने के लिए सात पुरुषों के साथ एक साथ सेक्स करने की इच्छा जताई ‌थी। इसके लिए उसने एक स्‍थानीय दलाल से संपर्क कर सात पुरुषों को अपने होटल में बुलाया। अखबार के अनुसार स्‍कार्टलैंड यार्ड पुलिस को इस मामले की भनक लगी तो वह उस होटल के कमरे में पहुंच गई जहां राजकुमारी चार पुरुषों के साथ एक साथ संबंध बनाने में मशगूल थी और बाकी ‌के तीन लोग गैलरी में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

हालांकि बाद में खबरें आई कि अखबार ने इस खबर को अपनी वेबसाइट से हटा लिया।
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