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किसान आंदोलन: मारपीट की घटना के बाद युवाओं को सौंपी गई सुरक्षा की जिम्मेदारी

Thu, 01 Jul 2021 08:51 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किसानों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई मारपीट के बाद किसान संगठन अलर्ट हो गए हैं। किसानों ने धरना स्थलों की सुरक्षा का जिम्मा युवा किसान नेताओं को सौंप दिया है। वहीं आसपास के राज्यों से भी किसान दिल्ली की बॉर्डर के लिए निकल चुके हैं। आने वाले दिनों में दिल्ली की सीमाओं पर फिर से किसान जुटेंगे और प्रदर्शन की नई रणनीति तैयार करेंगे।
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सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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बुधवार दोपहर को गॉजीपुर बॉर्डर पर हुई घटना के बाद किसान नेताओं ने हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसानों को दिल्ली पहुंचने के लिए कह दिया है। जानकारी के अनुसार किसान नेताओं को उम्मीद है कि हर गांव से करीब 100 से ज्यादा किसान आगामी दिनों में दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचेंगे। 

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किसान संगठनों का कहना है कि प्रदर्शन स्थलों पर कम होती भीड़ का राजनीतिक दल फायदा उठा रहे हैं। इसलिए हमने तीनों सीमाओं की सुरक्षा का जिम्मा युवा किसानों को सौंप दिया है। इसके अलावा सीमा प्रवेश बिंदुओं पर भी सुरक्षा बढ़ा दी है कि कोई अनजान व्यक्ति धरना स्थल के अंदर प्रवेश न कर सके।

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आसपास के लोगों को भी भड़का रहे भाजपा नेता

किसान नेता हन्ना मौला ने अमर उजाला से कहा, किसानों के साथ भाजपा नेताओं की मारपीट का यह कोई पहला मामला नहीं है। इस तरह की कई घटनाएं पहले भी होती आई है। सिंघु बॉर्डर हो या फिर गॉजीपुर, भाजपा के कार्यकर्ता आसपास के रहने वाले गांव के लोगों को किसानों के खिलाफ भड़काने का काम करते हैं।

भाजपा कार्यकर्ता ग्रामीणों से कहते हैं कि इन किसानों के कारण ही आप लोगों का रास्ता बंद हो गया हैं। रोजगार ठप हो गया है। इसके बाद लोग किसानों से झगड़ने लगते हैं। जबकि सभी किसान संगठनों ने बॉर्डर के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि किसानों के कारण उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी।

मौला ने कहा कि बुधवार की घटना तो सबके सामने आ गई लेकिन कई बार भाजपा के कार्यकर्ता इस तरह की हरकतें करते हैं। इस बारे में कई बार हमने मौके पर मौजूद पुलिस और सुरक्षाकर्मियों से शिकायत भी की लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। इसके बाद हमने लोगों के प्रदर्शन स्थल पर आने-जाने पर रोक लगा दी।
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किसानों को भी दी गई संयम बरतने की सलाह

घटना के बाद किसानों को भी संयम बरतने के लिए कहा गया है। सभी से कहा गया है कि इस तरह की कोई भी घटना होती है तो तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी दी जाए। किसी भी स्थिति में कानून हाथ में नहीं लें क्योंकि लाल किले की घटना के बाद से किसानों के प्रति आम लोगों की धारणा बदल चुकी है।

किसान नेता राकेश टिकैत ने अमर उजाला से कहा, पुलिस को अपना काम करना चाहिए मगर किसी का एजेंट नहीं बनना चाहिए। यह साफ देखने में आ रहा है कि पुलिस भारतीय जनता पार्टी की एजेंट बनकर काम कर रही है। अगर पुलिस एजेंट बनकर काम करेगी तो उनका भी इलाज बांध दिया जाएगा। 

टिकैत ने आगे कहा कि बीते तीन दिनों से भाजपा के कार्यकर्ता यहां आ रहे थे। वो यहां पर क्या लेने के लिए आ रहे थे? जब भाजपा के लोग तीन दिनों से यहां आ रहे थे तो इसे लेकर पुलिस क्या कर रही थी? उन्होंने कहा कि पुलिस अपनी गुंडई छोड़ दे, किसी की वर्कर न बने। जिनको जाना है सड़क से जाए हम नहीं रोक रहे।

किसान नेता टिकैत ने कहा कि जहां तक सुरक्षा का सवाल है तो दिल्ली के बॉर्डर पर आस-पास के सभी गांवों के किसान जुट रहे हैं। हम लोगों ने अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी अब खुद संभाल ली है। उन्होंने कहा कि अब युवा किसान बॉर्डर की सुरक्षा बारी बारी से संभालेंगे और स्थिति को सामान्य बनाए रखेंगे। 

गौरतलब है कि, 30 जून को भाजपा प्रदेश मंत्री अमित बाल्मीकि दिल्ली से गाजियाबाद आ रहे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उनका स्वागत करने के लिए यूपी गेट पहुंचे थे। यूपी गेट पर प्रदेश मंत्री का काफिला पहुंचने के दौरान ही किसान और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट की घटना हुई थी।
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