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किसानों ने कुंडली, मानेसर, पलवल एक्सप्रेसवे की ट्रैक्टर रैली को एक दिन आगे बढ़ाया

Tue, 05 Jan 2021 10:12 PM IST
सुरेंद्र जोशी हरि वर्मा, नई दिल्ली

सार

  • आठ जनवरी की वार्ता में सरकार को बिंदुवार खामियां गिनाकर कानून वापसी से कम मंजूर नहीं का देंगे संदेश
  • फिर से न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और तीनों कानूनों की वापसी की प्रक्रिया पर ही होगी बात
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पंजाब के पटियाला में अलाव तापते आंदोलनकारी किसान। - फोटो : pti
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विस्तार
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मौसम के मिजाज को देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने छह जनवरी को कुंडली, मानेसर, पलवल एक्सप्रेसवे यानी केएमपी पर होने वाली ट्रैक्टर रैली को एक दिन आगे बढ़ा दिया है। अब केएमपी पर ट्रैक्टर्स की परेड सात जनवरी को होगी। किसानों की सरकार से अगली वार्ता आठ जनवरी को प्रस्तावित है। उससे एक दिन पहले ट्रैक्टर मार्च कर किसान संगठनों ने शक्ति प्रदर्शन का फैसला लिया है।
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सरकार से सातवें दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद मंगलवार को पंजाब के 31 किसान संगठनों की संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बैठक हुई। इसमें केएमपी ट्रैक्टर मार्च को एक दिन आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। जाहिर है, सरकार के साथ आठ जनवरी को होने वाली बातचीत से ठीक एक दिन पहले केएमपी ट्रैक्टर मार्च के जरिए किसान संगठनों ने शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ दबाव बढ़ाने की रणनीति बनाई है।

पूर्व घोषित आंदोलन कार्यक्रम में बदलाव नहीं
किसान मोर्चे ने पूर्व घोषित आंदोलन के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं है। 13 जनवरी को लोहड़ी के दिन कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने, 18 जनवरी को महिलाओं को जोड़ने, 23 जनवरी को आजाद हिंद किसान फौज दिवस और 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड का एलान यथावत है।
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इस बीच छह से 20 जनवरी तक जागरूकता पखवाड़े के अंतर्गत किसानों को जुटाया जाएगा। देशभर में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे और सभी राज्यों में राजभवन का घेराव किया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि 26 जनवरी को राजपथ पर सरकारी आयोजन के बाद किसान दिल्ली में ट्रैक्टर परेड करेंगे। पंजाब के किसानों की आंदोलन में भागीदारी है ही, अब इस सप्ताह हरियाणा-राजस्थान के साथ-साथ देश के हर घर से एक किसान को आंदोलन में जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।


आठ जनवरी की वार्ता निर्णायक
संयुक्त किसान मोर्चा ने आठ जनवरी को सरकार से निर्णायक बात करने का मन बना लिया है। सरकार को बिंदुवार खामियां गिनाते हुए तीनों कानूनों की वापसी से कम कुछ भी नहीं का संदेश देने की तैयारी है। कानून वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की प्रक्रिया पर ही फिर बात होगी।

जाहिर है, सरकार के साथ-साथ अब किसान संगठनों ने भी लंबी लड़ाई की तैयारी कर ली है। राजस्थान.हरियाणा सीमा पर दिल्ली के काफी करीब कई किलोमीटर तक आंदोलनकारी किसानों के साथ महिलाएं जुट रही हैं। मौसम खराब होने की वजह से आंदोलन स्थलों पर किसानों के तंबुओं में जलभराव हो गया है। वाटर प्रूफ पंडाल आदि मंगाकर लंबे संघर्ष की व्यवस्था की जा रही है। आंदोलनकारी किसान नेताओं ने फिर देश भर के किसानों से निजी कंपनी के उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की है।
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