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किसान बोले-मरेंगे या जीतेंगे, केंद्र ने कहा-कानून वापस नहीं लेंगे

Sat, 09 Jan 2021 04:27 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Farmers-Govt meeting - फोटो : ANI
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तीनों कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को बातचीत फिर बेनतीजा रही। नौवें दौर की इस वार्ता में तल्खी इतनी दिखी कि  किसानों ने तख्तियों के माध्यम से सरकार को कानून वापस लेने का दो टूक संदेश देते हुए कहा- मरेंगे या जीतेंगे। यह भी कहा, कानून वापसी तो ही घर वापसी। वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, कानून वापस नहीं लेंगे। अच्छा हो कि अब इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ही फैसला करे। हालांकि, बातचीत में हल न निकलने के बावजूद दोनों पक्ष 15 जनवरी को वार्ता करने को राजी हो गए।

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विज्ञान भवन में तकरीबन तीन घंटे तक 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश ने बातचीत का जिम्मा संभाला। मंत्रियों के सामने किसानों ने कृषि कानूनों की वापसी की मांग दोहराई। किसानों ने कडे़ तेवर अपनाते हुए कहा, हमें बहस नहीं करनी, सरकार कृषि कानूनों को वापस ले। केंद्र ने साफ तौर पर इस मांग को खारिज करते हुए कहा, कानूनों के प्रावधानों पर ही बातचीत की जा सकती है। सरकार ने कहा, कई राज्यों के किसानों के एक बड़े समूह ने इन कानूनों का स्वागत किया है। किसानों को पूरे देश का हित समझना चाहिए। वार्ता से पहले तोमर ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।

वहीं, अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा, बैठक का माहौल गर्म था। हमने कह दिया है कि कानून वापसी के सिवा कुछ भी मंजूर नहीं है। हम किसी अदालत  में नहीं जाएंगे। कानून वापस लो, नहीं तो हमारी लड़ाई चलती रहेगी। 26 जनवरी को हमारी परेड होगी। वहीं, बैठक से पहले तोमर ने कहा था कि केंद्र सरकार और किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से पहले एक समाधान तक पहुंचने के लिए कदम उठाने होंगे। मुझे उम्मीद है कि वार्ता सकारात्मक माहौल में होगी और समाधान मिल जाएगा। चर्चा के दौरान हर पक्ष को समाधान तक पहुंचने के लिए पहल करनी होगी।
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को ध्यान में रखते हुए तय की गई नई तारीख
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में वार्ता ज्यादा नहीं हो सकी और अगली तारीख सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 11 जनवरी को होने वाली सुनवाई को ध्यान में रखते हुए तय की गई है। सरकारी सूत्रों ने कहा, सुप्रीम कोर्ट किसान आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों के अलावा तीनों कानूनों की वैधता पर भी विचार कर सकता है। 

किसान बोले, हम बैठक में तारीख लेने नहीं आए
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में तीखी बहस के बीच किसानों ने स्पष्ट तौर पर कहा, हम यहां तारीख लेने नहीं आए हैं। सरकार किसानों के पक्ष में नहीं है। जब सरकार ने बैठक के बीच में किसानों से कुछ देर के लिए ब्रेक लेने को कहा तो किसानों ने कहा, केंद्र को हमारे सवालों के जवाब देना चाहिए। हम बैठक में चाय और खान-पान के लिए नहीं आए हैं। 

किसान नेता बोले, आप तर्क देते रहेंगे, पर हमें बहस नहीं करनी
बातचीत के दौरान के एक वीडियो में एक किसान नेता बलबीर राजेवाल ने मंत्रियों से कहा, आप जिद पर अड़े हैं। यह तो स्थापित तथ्य है कि आप कृषि क्षेत्र में बिल्कुल दखल नहीं दे सकते। आप अपने संयुक्त सचिव को लगा देंगे, फिर सचिव को लगा देंगे। वे कोई न कोई तर्क देते रहेंगे। हमारे पास भी सूची है, मगर हमें इस पर बहस नहीं करनी है। फिर भी आपका फैसला है, क्योंकि आप सरकार हैं। लोगों की बात शायद कम लगती है। जिसके पास ताकत है, उसकी बात ज्यादा होती है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, सरकार का मन शायद मामले को निपटाने का नहीं है। आप साफ-साफ जवाब दे दें तो हम उठकर चले जाएंगे।

हमने 10 कदम बढ़ाया, वे भी कुछ कदम बढ़ाएं तो ही हल: चौधरी
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा, इन कानूनों का समर्थन करने वाले करोड़ों किसान भी हैं। हमने किसानों के विरोध को समझा और 10 कदम आगे बढ़ाया। अगर वे सरकार के दृष्टिकोण को भी समझते हैं और कुछ कदम आगे बढ़ाते हैं, तो हम निश्चित रूप से समाधान तक पहुंचेंगे।

किसानों ने बैठक में साधा मौन, तीनों मंत्रियों ने एकांत में की बातचीत
करीब एक घंटे की वार्ता के बाद किसान नेताओं ने बैठक के दौरान मौन धारण करना तय किया और इसके साथ ही उन्होंने नारे लिखी हुई तख्तियां भी लहराईं। किसान नेता बलवंत सिंह ने मरेंगे या जीतेंगे संबंधी तख्ती भी दिखाई। इसके बाद तीनों मंत्री आपसी विचार विमर्श के लिए हॉल से निकलकर एकांत में चले गए। किसान नेताओं ने लंच ब्रेक भी नहीं लिया और मुलाकात कक्ष में भी वार्ता के समापन तक डटे रहे। 

किसने क्या कहा?
सरकार सिर्फ संशोधन पर बात करना चाहती है, जबकि हम कानून वापसी चाहते हैं। अब 15 जनवरी को फिर बातचीत होगी। जब तक सरकार हमारी मांग नहीं मानती तब तक आंदोलन खत्म होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।-राकेश टिकैत, किसान नेता

बैठक में सरकार ने किसान संगठनों से प्रावधानों पर चर्चा करने और आंदोलन वापस लेने की अपील की। सरकार ने किसान संगठनों से कहा कि कानून वापस लेने के अलावा किसानों की सभी मांगों पर सरकार बातचीत के लिए तैयार है। किसान संगठन कोई विकल्प ही नहीं दे रहे हैं।-नरेंद्र सिंह तोमर, कृषिमंत्री

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