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पहले दिन दो घंटे देरी से बैठी किसान 'संसद', टिकैत की सरकार को चेतावनी- अब गांव के डॉक्टर करेंगे 'आपका' इलाज

Thu, 22 Jul 2021 06:44 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टिकैत ने चेतावनी और तंज भरे लहजे में नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि किसानों का इलाज देश की संसद से होगा लेकिन तुम्हारा इलाज गांव में आना तो वहां होगा। वहां के डॉक्टर आपका इलाज करेंगे...
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kisan sansad - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों की जंतर-मंतर पर 'किसान संसद' की शुरुआत हो गई। पहले ही दिन ये संसद अपने तय समय से करीब दो घंटे देरी से शुरू हुई। किसानों की संसद में पहले घंटे में तीन स्पीकर और तीन डिप्टी स्पीकर का चयन किया गया। इसके बाद किसान नेताओं ने एक-एक कर अपनी बात रखनी शुरू की। एक घंटे की कार्यवाही चलने के बाद किसानों ने लंच ब्रेक लिया। दोपहर ढाई बजे एक बार फिर किसान संसद बैठी। इसमें सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ कई प्रस्ताव भी पेश किए गए। जब तक संसद का मॉनसून सत्र जारी रहेगा तब तक हर रोज़ किसान ऐसे ही अपनी संसद लगाएंगे।

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गुरुवार सुबह करीब साढ़े बारह बजे भारी सुरक्षा के बीच 200 किसानों का जत्था बसों के जरिए जंतर-मंतर पहुंचा। इसके बाद 'किसान संसद' की शुरुआत आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि देकर हुई। वरिष्ठ किसान नेता हन्नान मौला को 'किसान संसद' का अध्यक्ष और मंजीत सिंह राय को डिप्टी स्पीकर बनाया गया है।

मौला ने बताया कि किसानों की बात संसद नहीं सुन रही है इसलिए सभी सांसदों को हमने चिट्ठी दी है कि हमारे वोट से जीते हैं तो ऐसा काम करें कि हम वोट देते समय उन्हें याद रखें। ईमानदार हैं तो हमारा सवाल उठाएं। आज हम यहां आए। पहले दिन कृषि कानूनों के पहले एपीएमसी पर चर्चा हुई। इसके बाद हम कानून को संसद में खारिज करेंगे और संसद से अपील करेंगे कि 'किसान संसद' की बात मानकर कानून खारिज करे।

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तीन स्पीकर, तीन डिप्टी स्पीकर  

किसान नेता शिव कुमार के बताया कि किसान संसद में तीन स्पीकर, तीन डिप्टी स्पीकर बनाए गए हैं। हर किसी को 90 मिनट का वक्त मिला है, एक स्पीकर के साथ एक डिप्टी मौजूद रहेगा। किसान नेता राकेश टिकैत ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि किसान अब अपनी संसद बैठाएंगे। अगर सांसद किसानों के हक में संसद के भीतर आवाज़ नहीं उठाते तो चाहे वह किसी भी दल के हों, उनके क्षेत्र में उनका पुरजोर विरोध होगा। केंद्र सरकार को ये काले कानून वापस लेने ही होंगे।

टिकैत ने चेतावनी और तंज भरे लहजे में नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि किसानों का इलाज देश की संसद से होगा लेकिन तुम्हारा इलाज गांव में आना तो वहां होगा। वहां के डॉक्टर आपका इलाज करेंगे। जंतर-मंतर पर जारी किसानों की संसद में पंजाबी फिल्म अभिनेत्री सोनिया मान भी पहुंचीं। उन्होंने कहा कि हमारी मुहिम सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचाना है, संसद से लेकर सड़क तक ये लड़ाई जारी रहेगी।

नेताओं ने गिनाई कानूनी खामियां

पहले दिन किसान संसद में मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के आए किसानों के जत्थों ने हिस्सा लिया। प्रमुख नेताओं ने किसानों को नए कृषि कानूनों की खामियों के बारें में बताया और उस पर चर्चा की। हर बार की तरह इस बार भी किसान प्रदर्शन स्थल पर अपना खाना खुद लेकर आए थे। जैसे ही संसद का लंच ब्रेक हुआ वैसे ही सभी किसानों ने साथ मिलकर लंगर खाया।
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बसों की चेकिंग और खराबी के कारण हुई देरी

पुलिस और किसान संगठनों के बीच किसान संसद का समय सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक तय हुआ है लेकिन पहले दिन किसान करीब दो घंटे देरी से जंतर-मंतर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के साथ मौजूद योगेंद्र यादव ने कहा कि पुलिस द्वारा दूसरी बार बसों की चेकिंग गई जिसकी वजह से किसानों को जंतर मंतर तक पहुंचने में देरी हुई। वहीं बीच रास्ते में एक बस के खराब होने के कारण भी कुछ किसान देरी से प्रदर्शन स्थल पहुंचे।

पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

किसान संसद को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और संसद भवन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है। इसके अलावा किसानों के प्रदर्शन पर सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी रखी जा रही है। सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर भी भारी फोर्स तैनात कर दी गई है। गौरतलब है कि बीते वर्ष नवंबर से नए कृषि कानूनों की मांग को रद्द करने को लेकर किसान संगठन दिल्ली की सीमाओं पर धरने पर बैठे हैं। किसानों और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की चर्चाएं भी हुई लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
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