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'दीदी का साथ नहीं छोड़ूंगा': दिल्ली में बोले सांसद कीर्ति आजाद; क्या बगावत की आग में झुलस रही टीएमसी?

Sun, 07 Jun 2026 09:51 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।

सार

पश्चिम बंगाल की सत्ता गंवाते ही टीएमसी में भारी बगावत हो गई है। पार्टी के 58 विधायकों और 20 सांसदों ने बगावती तेवर अपना लिए हैं, जिसके बाद दिल्ली में कीर्ति आज़ाद ने ममता बनर्जी के पक्ष में मोर्चा संभाला है। वहीं डैमेज कंट्रोल के लिए संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है।
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कीर्ति आजाद, टीएमसी सांसद - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सूबे की सियासत को पूरी तरह पलट दिया है। इस करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे भीषण राजनीतिक संकट से जूझ रही है। इस बीच टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि जो गद्दार है उसको गद्दारी करने दो, टीएमसी को इससे कुछ नहीं होने वाला। मैं दीदी के साथ खड़ा था, खड़ा हूं और हमेशा खड़ा रहूंगा। मर जाऊंगा लेकिन उनका साथ नहीं छोड़ूंगा। एक घायल शेरनी और ज्यादा खतरनाक हो जाती है।
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बगावत के इस सबसे बड़े तूफान के बीच, ममता बनर्जी 'इंडिया ब्लॉक' की बैठक और अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाने के लिए देश की राजधानी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। वहीं कीर्ति आजाद ने ममता बनर्जी से मुलाकात कर वफादारों की लामबंदी शुरू कर दी है और बागियों पर सीधा हमला बोला है।

कोलकाता से शुरू हुआ विद्रोह, बागी हुए दो-तिहाई विधायक
यह पूरा सियासी घमासान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद शुरू हुआ है, जिसने सूबे की राजनीति को पूरी तरह पलट दिया है। इस करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपने इतिहास के सबसे भीषण राजनीतिक संकट से जूझ रही है। राज्य की सत्ता से बेदखल होकर टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई है। इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल कर लिया है। इस चुनावी शिकस्त के तुरंत बाद ही पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ा आंतरिक विद्रोह खड़ा हो गया।
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टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से लगभग 58-59 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। बागियों की यह संख्या दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई के आंकड़े को आसानी से पूरा करती है। इस बगावत को विधानसभा में तब बड़ी सफलता मिली, जब निष्कासित टीएमसी नेता ऋतब्रत बनर्जी को इन 58 बागी विधायकों का खुला समर्थन मिल गया। पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथिन्द्र बोस ने इस बागी गुट को तुरंत मंजूरी दे दी। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक रूप से विधानसभा में 'नेता प्रतिपक्ष' घोषित कर दिया है। इसी बीच, संकट को गहराते देख ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले फिरहाद हकीम ने भी कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है।

यह भी पढ़ें:West Bengal: अग्निमित्रा पॉल ने धृतराष्ट्र से की ममता बनर्जी की तुुलना, मदरसों को बताया घुसपैठियों का ठिकाना

कोलकाता का यह सियासी ड्रामा अब पूरी तरह दिल्ली स्थानांतरित हो चुका है। खबरों के मुताबिक, टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 बागी सांसद भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। ये सांसद जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर संसद में एक अलग गुट बनाने की मांग कर सकते हैं। बागी विधायकों और सांसदों का मुख्य विरोध पार्टी में केंद्रीकृत फैसले लेने और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर है। बागी गुट साफ तौर पर मांग कर रहा है कि अभिषेक बनर्जी को मुख्य भूमिका से हटाया जाए। वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी केवल एक मुख्य सलाहकार के रूप में काम करें और संगठन लोकतांत्रिक तरीके से चले।
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दीदी का डैमेज कंट्रोल
बगावत की इस तेज आग को दबाने के लिए ममता बनर्जी ने दिल्ली में रहकर ही पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल कर दिया है। अभिषेक बनर्जी के प्रभाव को कम करने के लिए डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है, ताकि फैसले सामूहिक रूप से लिए जा सकें। दूसरी तरफ, टीएमसी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इस पूरी बगावत और पार्टी को अस्थिर करने के पीछे भाजपा का हाथ है, जो महाराष्ट्र जैसा सियासी खेल अब बंगाल में दोहराना चाहती है।
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