कीर्ति ने कहा- "हैल्लो डियर जेटली, हमपर डेफिमेशन फाइल कर रहे हो ना? प्लीज करो ना''
कीर्ति आजाद और अरुण जेटली के बीच तनातनी की नींव साल 2009 में ही पड़ गई थी। जब अरुण जेटली डीडीसीए (दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ ) के अध्यक्ष थे उस वक्त कीर्ति आजाद ने डीडीसीए के सदस्यों पर अपने साथ मारपीट करने का आरोप लगा था। साल 2011-12 में अरुण जेटली से खार खाए बैठे कीर्ति ने डीडीसीए में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जेटली से सवाल किए और उनपर आरोप लगाए।
ऐसे पड़ी कीर्ति के 'आजाद' होने की पटकथा की नींव
कीर्ति यहीं नहीं रुके। उन्होंने साल 2012 में इस मामले को संसद में उठाया। तात्कालिक कांग्रेस सरकार ने इस पर एसएफआईओ जांच का आदेश दिया। 2015 में दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मामले का राजनीतिक फायदे लेने की कोशिश कि और जेटली को चौतरफा घेरना शुरू कर दिया। 20 दिसंबर 2015 को आम आदमी पार्टी के जेटली के खिलाफ मुखर होते ही कीर्ति आजाद ने एक और बाण छोड़ा और भारतीय हॉकी टीम में जेटली और उनके परिवार वालों के कथित हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए। एक ही दिन बाद 21 दिसंबर 2015 को कीर्ति ने सार्वजनिक तौर पर अरुण जेटली को चुनौती दे डाली कि अगर हिम्मत है तो उनके खिलाफ मानहानि का दावा ठोके।
कीर्ति ने कहा- "हैल्लो डियर जेटली, हम पर डेफिमेशन फाइल कर रहे हो ना? प्लीज करो ना''
60 साल के हो चुके कीर्तिवर्धन भागवत झा आजाद यानी आज के कीर्ति आजाद का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले में हुआ।
60 साल के हो चुके कीर्तिवर्धन भागवत झा आजाद यानी आज के कीर्ति आजाद का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले में हुआ। 2 जनवरी 1959 को पैदा हुए कीर्ति आजाद के पिता भागवत झा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री थे। पिता से ही कीर्ति को राजनीतिक विरासत मिली। मैथिल परिवार में जन्मे कीर्ति ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की और दिल्ली की तरफ से रणजी ट्रॉफी खेला। साल 1983 में जब भारत पहली बार वर्ल्ड कप जीता कीर्ति आजाद को भी लोकप्रियता मिली। वह उस वक्त भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य थे और पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ अपनी आक्रामक पारी के चलते उन्होंने काफी वाहवाही बटोरी।
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कीर्ति आजाद ने राजनीति में कदम रखा और बिहार के दरभंगा से तीन बार सांसद चुने गए। वह साल 1993 से 1998 के बीच दिल्ली से तीन बार विधायक रहे।