गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में रिक्तियों में बड़े अंतर की वजह राज्यसभा में रखी। उन्होंने इसके पीछे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सेवा (वीआरएस) यानि समय से पहले रिटायरमेंट्स को जिम्मेदार बताया है। आकंड़ों को राज्यसभा में उठाते हुए किरण रिजिजू ने कहा कि वीआरएस की वजह सेना में बल की कमी होती है। वहीं रिक्तियों में देरी होने की वजह से खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने राज्यसभा में लिखित में दिया कि अगर साल 2016-17 के आकंड़ों को देखा जाए तो वीआरएस लेने वालों की संख्या में 450 फीसदी का इजाफा हुआ है। दरअसल, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी और असम राइफल्स के करीब 9065 सैन्य कर्मी वीआरएस लेने जा रहे हैं।
वहीं साल 2014-15 में बड़ी संख्या में करीब 5289 सैनिकों ने वीआरएस लिया था। हालांकि ये आकंड़ा साल 2015-16 में थम गया था, लेकिन इस साल आंकड़े रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। उन्होंने इसके पीछे कई वजह बताई, जिसमें सबसे अहम कर्मियों के व्यक्तिगत परेशानियां हैं।
अब तक करीब 10 लाख मजबूत केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को एक लंबे समय से पीड़ित किया गया है। इन बलों के सूत्रों ने कहा कि घरेलू कारण, कैरियर ठहराव, वेतन समता की कमी, कड़ी मेहनत की स्थिति, से अधिकांश पुरुषों को छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। वीआरएस लेने में बीएसएफ सबसे ऊपर आता है, जहां करीब 4274 सैन्य कर्मी वीआरएस ले रहे हैं। सीआरपीएफ के 3280 और सीआरसीएफ के 765 कर्मी वीआरएस पर जा रहे हैं।