विपक्ष की तरफ से केंद्र सरकार पर सदन में जबरन विधेयकों को पास करने के आरोपों पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कई बार जब विधेयकों पर मतभेद होते हैं, तब ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। साथ ही रिजिजू ने तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़ी एक पुरानी घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में युवा जोश और स्थिरता जरूरी है, लेकिन धैर्य और अनुभव भी उतना ही जरूरी होता हैं। संसद में शालीनता और सम्मान बनाए रखना हर सदस्य की जिम्मेदारी है। बता दें कि केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने ये बात एक न्यूज एजेंसी के साथ पॉडकास्ट में कही।
सदन में महुआ मोइत्रा से जुड़े विवाद का जिक्र
संसदीय समन्वय की भूमिका पर बोले रिजिजू
रिजिजू ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री के रूप में विपक्ष और सरकार के बीच तालमेल बिठाना एक चुनौतीपूर्ण काम है। उन्होंने कहा, “मैं कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं से बात करता हूं, उनके घर भी जाता हूं। कई बार तीखी बहस होती है, लेकिन यही संसदीय लोकतंत्र की खूबी है।
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वक्फ संशोधन बिल और जेपीसी विवाद पर भी बोले रिजिजू
वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) में हुए विवाद को लेकर भी रिजिजू ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि कुछ सदस्य नाराज हो गए थे और गुस्सा दिखाकर अपनी राय रखी। लेकिन समिति में सबकी बात सुननी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार जब उन्हें जरूरी विधेयकों को समय पर पास कराना होता है, तो कुछ लोग उन्हें 'बुलडोजर मंत्री' कह देते हैं। इसके साथ ही रिजिजू ने अंत में कहा कि संसद में अनुभव, सम्मान और संवाद की परंपरा को सभी को बनाए रखना चाहिए। “कठोर रुख और हड़बड़ी से लोकतंत्र नहीं चलता, सबको मिलकर रास्ता निकालना चाहिए।