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Congress: खरगे बोले- भाजपा प्रत्याशी ही कह रहे संविधान बदलेगा, ऐसे लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती पार्टी

Wed, 24 Apr 2024 05:19 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/चेंगानूर

सार

केरल में खरगे ने कहा कि मैं सामाजिक न्याय की इस भूमि से पीएम मोदी को चुनौती देता हूं कि वह इन लोगों को भाजपा से निकालें। उन्होंने कहा कि इन्हें भाजपा के चुनाव चिह्न पर चुनाव क्यों लड़ने दिया जा रहा है, क्या यही मोदी की गारंटी है।
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मल्लिकार्जुन खरगे (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आरएसएस से लेकर लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी लगातार कह रहे हैं कि दो तिहाई बहुमत मिलने पर वे देश के संविधान को बदल देंगे। उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी के ऐसे लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं करते।

केरल में खरगे ने कहा कि मैं सामाजिक न्याय की इस भूमि से पीएम मोदी को चुनौती देता हूं कि वह इन लोगों को भाजपा से निकालें। उन्होंने कहा कि इन्हें भाजपा के चुनाव चिह्न पर चुनाव क्यों लड़ने दिया जा रहा है, क्या यही मोदी की गारंटी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एकमात्र राष्ट्रीय दल है, जो धर्मनिरपेक्षता, मौलिक अधिकार और लोकतंत्र में यकीन रखता है।

खरगे ने कहा, पिछले 10 सालों में पीएम मोदी ने सिर्फ अपने दो-तीन करीबी दोस्तों के लिए ही काम किया है। हवाईअड्डों, बंदरगाहों, कोयला खदानों, बिजली संयंत्रों और सार्वजनिक उपक्रमों सहित देश के सभी राष्ट्रीय संसाधनों को इन अमीर पूंजीपतियों को कौड़ियों के भाव बेच दिया गया है।

प्रधानमंत्री के शीर्ष 22 अमीर दोस्तों के पास 70 करोड़ भारतीयों के बराबर संपत्ति है। मोदी सरकार के पहले नौ वर्षों में एक लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की। हर दिन औसतन 30 किसानों ने आत्महत्या की। स्वतंत्र भारत में पहली बार किसानों पर कर लगाया गया।  

इंडिया गठबंधन ही कर सकता है तेज और समावेशी विकास

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आर्थिक असमानता को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि देश का तेज, समावेशी और टिकाऊ विकास इंडिया गठबंधन सरकार ही कर सकता है। साथ ही आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में अधिकतर सार्वजनिक संपत्तियां और संसाधन एक-दो कंपनियों के हाथों बेच दिए गए हैं। जयराम ने लिखा, प्रधानमंत्री आपको ये सब कभी नहीं बताएंगे कि 2012 से 2021 तक देश में बनी संपत्ति का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा सिर्फ एक फीसदी आबादी के पास गया है।

 

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