कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने अपने पिता का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि पटना में भाषण के दौरान भाजपा के एक समर्थक ने पहले खरगे को उकसाया था। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने उसी भाषा में जवाब दिया, जिसे सामने वाला समझता है। प्रियांक ने भाजपा पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ पुराने बयानों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने जीएसटी, चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।
खरगे के बयान पर प्रियांक ने क्या सफाई दी?
प्रियांक खरगे ने कहा कि भाजपा को इस विवाद पर सवाल उठाने से पहले अपने पुराने व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जन्मदिन के मौके पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। प्रियांक के मुताबिक, राहुल गांधी को ‘हाइब्रिड बछड़ा’ और ‘पप्पू’ तक कहा गया। उन्होंने कहा कि भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को सुविधानुसार भूल रही है। प्रियांक ने दावा किया कि पटना में खरगे के भाषण के दौरान भाजपा समर्थक ने उनसे कहा था कि वह प्रधानमंत्री मोदी का कुछ नहीं बिगाड़ सकते और उनके पिता भी ऐसा नहीं कर सकते। प्रियांक के अनुसार, खरगे ने उसी भाषा में जवाब दिया।
जीएसटी और छोटे कारोबारियों को लेकर क्या बोले प्रियांक ?
प्रियांक खरगे ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले लागू जीएसटी व्यवस्था ने छोटे व्यापारियों और खुदरा दुकानदारों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद के भीतर और बाहर इन मुद्दों को उठाते रहे हैं और जीएसटी को आसान बनाने की मांग भी उन्होंने की थी। प्रियांक ने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया के जरिये जनादेश, चुनाव परिणाम और नेताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, इन मुद्दों को चुनौती देने की जरूरत है।
एक नवंबर के प्रदर्शन में व्यापारियों से शामिल होने की अपील क्यों की?
विपक्ष की ओर से एक नवंबर को प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन को लेकर प्रियांक खरगे ने व्यापारियों से भी इसमें शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनावी पारदर्शिता जैसे बड़े मुद्दे के लिए एक दिन का विरोध प्रदर्शन जरूरी है और इससे कारोबार पर बहुत बड़े स्तर पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, व्यापार संगठनों की ओर से प्रदर्शन के दौरान कारोबार प्रभावित होने की चिंता जताई गई थी। प्रियांक ने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग भी की।
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनावी नियमों पर प्रियांक ने क्या सवाल उठाए?
प्रियांक खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चुनावी प्रक्रिया में हुए बदलावों पर जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को न्यायिक संरक्षण किस आधार पर दिया गया, फॉर्म-6 में बदलावों को किसने मंजूरी दी और फॉर्म-7 की बड़ी संख्या में छपाई क्यों की जा रही है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने पर आपत्ति दर्ज करने या नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए होता है। प्रियांक ने चुनावी सॉफ्टवेयर में बदलाव की अनुमति देने वाले व्यक्ति या प्राधिकरण के बारे में भी जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि इन सवालों पर भाजपा सरकार को जवाब देना चाहिए।
प्रियांक ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग क्यों की?
प्रियांक खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में बदलाव और संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी इन मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रियांक के बयान में खरगे की टिप्पणी का बचाव, आर्थिक नीतियों की आलोचना और चुनावी पारदर्शिता की मांग एक साथ सामने आई। ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर उनके दावों की पुष्टि इस इनपुट में नहीं दी गई है।