New NHRC Chairperson: न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा के 1 जून को अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद से एनएचआरसी अध्यक्ष का पद खाली है। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने अधिकार समिति के आठवें अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और जून 2021 में उन्हें इसके शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली समिति ने बुधवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अगले अध्यक्ष का चयन करने के लिए बैठक की। वहीं इस बैठक को लेकर सूत्रों ने बताया कि, इस समिति में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के सांसद राहुल गांधी ने क्रमशः राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में बैठक में भाग लिया।
विज्ञापन
एक जून से खाली है NHRC अध्यक्ष का पद
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा के 1 जून को अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद से एनएचआरसी अध्यक्ष का पद खाली है। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने अधिकार समिति के आठवें अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और जून 2021 में उन्हें इसके शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में समिति करती हैं चयन
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नियंत्रित करने वाले कानून के अनुसार, एनएचआरसी प्रमुख का चयन करने वाली समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, लेकिन इसके सदस्य लोकसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और राज्यसभा के उपसभापति होते हैं।
विज्ञापन
किस आधार पर होता है एनएचआरसी अध्यक्ष का चयन
बता दें कि, न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा के पद छोड़ने के बाद एनएचआरसी की सदस्य विजया भारती सयानी इसकी कार्यवाहक अध्यक्ष बनीं। राष्ट्रपति की तरफ से चयन समिति की सिफारिश पर भारत के किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश या शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को एनएचआरसी का अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू और केजी बालकृष्णन उन लोगों में से हैं, जिन्होंने अतीत में इस अधिकार निकाय का नेतृत्व किया है।
मानवाधिकार उल्लंघन के 23.14 लाख से अधिक मामले दर्ज
देश दुनिया में 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। वहीं इस साल देश में मनाए गए मानवाधिकार दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थी। वहीं एक जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की शुरूआत से मानवाधिकार उल्लंघन के 23.14 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए और मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को राहत के रूप में आयोग की तरफ से 256.57 करोड़ रुपये की सिफारिश की गई हैं।