अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने खालिस्तान समर्थकों के एक छोटे समूह की ओर से भारतीय मिशनों पर हिंसा की घटनाओं के कुछ दिनों बाद कहा है कि खालसा एक 'एकजुट करने वाली ताकत' हैं, न कि विभाजित करने वाली ताकत।
एक प्रतिष्ठित सिख परिवार से आने वाले संधू ने शनिवार को एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की, जहां उन्हें कई अन्य प्रतिष्ठित सिख अमेरिकियों के साथ अमेरिका के सिखों की ओर से प्रतिष्ठित 'सिख हीरो अवार्ड' प्रदान किया गया। संधू ने कार्यक्रम में अपने मुख्य भाषण में कहा, ''बैसाखी के दिन गुरु गोबिंद सिंह द्वारा बनाया गया खालसा एकजुट करने वाली ताकत है, बांटने वाली ताकत नहीं।
खालसा परंपरा की शुरुआत 1699 में सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने की थी। उन्होंने कहा कि सिख धर्म और इतिहास की महत्वपूर्ण अवधारणाओं व बुनियादी बातों में सार्वभौमिकता, एकता, समानता, ईमानदार जीवन, सेवा, ध्यान, मन की शांति और लोगों के बीच सद्भाव शामिल हैं।
भारतीय राजनयिक ने कहा कि अकाल तख्त और निशान साहिब में फहराया जाने वाला खालसा झंडा एकता, शांति और सार्वभौमिक प्रेम का ध्वज है और सिख धर्म समावेश, भाईचारे, प्रेम, समानता और गोता लगाने का धर्म है। सिंह ने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में अलगाववादियों के एक छोटे समूह की ओर से हिंसा की घटनाओं को अंजाम देने की ओर इशारा करते हुए ये बातें कही।