किसान आंदोलन में खालिस्तान कनेक्शन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आरोप है कि कनाडा में बैठा चरमपंथी मो. धालीवाल किसान आंदोलन की आड़ में खालिस्तान का एजेंडा फैलाने की कोशिश कर रहा है। उसी ने 'पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन' के जरिए स्विडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग को वह टूलकिट उपलब्ध कराई, जिसमें किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शन में शामिल होने, हिंसा करने और सोशल मीडिया पर मुहिम चलाने की पूरी योजना बताई गई थी।
मोगा जिला मुख्यालय पर झंडा फहराने के आरोपियों को पाकिस्तान भागने की कोशिश करते हुए दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। इन आतंकियों को गिरफ्तार करने वाले दिल्ली पुलिस के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया था कि पाकिस्तान देश में खालिस्तान आंदोलन को हवा देने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह खालिस्तानी आतंकियों को आर्थिक मदद, हथियार उपलब्ध कराने के साथ-साथ संरक्षण देने का काम भी करता है। गोपाल चावला नाम के खालिस्तानी आतंकी की मदद से वह पंजाब के युवाओं को भड़काने की कोशिश करता रहता है। पाकिस्तान के साथ कुछ अन्य देश भी भारत को अस्थिर करने की साजिश में शामिल हो सकते हैं।
खालिस्तानी चरमपंथी पंजाब के भोले-भाले गरीब युवाओं को अपने प्रभाव में लाने की कोशिश करते रहते हैं। इसके लिए वे यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के मंचों पर युवाओं से संपर्क करते हैं। थोड़ी सी बातचीत के दौरान जो भी युवा उनकी चाल में फंस जाते हैं, वे उनके जरिए आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रचना शुरू कर देते हैं। मोगा की घटना में शामिल आतंकी दसवीं-बारहवीं तक पढ़े सामान्य युवा थे, जो ज्यादा पैसा कमाने की लालच में सोशल मीडिया के माध्यम से खालिस्तानी आतंकियों के संपर्क में आ गए थे।
सुरक्षा बलों के मुताबिक नशे की गिरफ्त में फंसे युवा पाकिस्तानी-खालिस्तानी सोच को आगे बढ़ाने में आसान शिकार बन जाते हैं। इसके जरिए नशे के कारोबार में जुटे आतंकी अपना कारोबार भी बढ़ाने की कोशिश करते हैं और साथ ही इस कमाई से मिले पैसों का इस्तेमाल खालिस्तानी सोच को आगे बढ़ाने के लिए की जाती है। सरकार को इसे कई स्तरों पर निबटने की जरूरत है।
किसान नेता बीरपाल सिंह ने अमर उजाला से कहा कि जिस तरह बार-बार किसान आंदोलन में खालिस्तान का नाम आने से आंदोलन की बदनामी हो रही है, इससे किसान नेताओं और आंदोलन दोनों की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। सरकार को विदेशी सरकारों से बातचीत कर इसका प्रयास करना चाहिए कि उनकी जमीन भारत विरोध के लिए इस्तेमाल न की जा सके।