दिल्ली चुनाव के नतीजे आने के बाद राजधानी में नई सरकार का गठन हो गया है। दिल्ली की भाजपा सरकार सदन में एक के बाद एक कैग रिपोर्ट सदन के पटल पर ला रही है। इन सबके बीच आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं।
आखिर अरविंद केजरीवाल के सामने न आने की वजह क्या है? आप के लिए आगे का रास्ता क्या है? कैग की रिपोर्ट का आप की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? इन सभी सवालों पर इस हफ्ते के ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और राजकिशोर मौजूद रहे।
रामकृपाल सिंह: अरविंद केजरीवाल के ऊपर अदालत में मामले चल रहे हैं। आने वाले समय में ये मुकदमे बढ़ेंगे। अब तक उनके मामलों की पैरवी करने वाले वकीलों की फीस सरकारी खजाने से जा रही थी। अब वो सरकारी खजाने से नहीं जाएगी। ये केजरीवाल से लेकर सिसोदिया, सत्येंद्र जैन जैसे सभी नेताओं के लिए आने वाले समय में बड़ा सवाल रहेगा कि अब केस फीस का पैसा कहां से आएगा। केजरीवाल को अब राजनीतिक लड़ाई लड़नी है। पंजाब में सरकार को बचाना है। कैग की रिपोर्ट को आप झुठला नही सकते हैं।
राकेश शुक्ल: कैग की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया कि आप के कारण दिल्ली सरकार को कितना नुकसान हुआ है। यह रिपोर्ट भले अदालतों में मान्य नहीं हो लेकिन घाटा कितना हुआ यह सामने आ गया है। इस तरह की 14 रिपोर्ट आनी हैं। भले इसका अदालत से लेना-देना नहीं हो लेकिन जनता के बीच आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की छवि पर असर तो पड़ेगा। केजरीवाल को भी यह महसूस हो रहा है कि हमारी स्थितियां बहुत मुफीद नहीं हैं।
पूर्णिमा त्रिपाठी: अभी सिर्फ अरविंद केजरीवाल ही नहीं, बल्कि पूरी आम आदमी पार्टी अस्तित्व के संकट से गुजर रही है। अब उनके सभी समर्थक उनसे दूर हो गए हैं। केजरीवाल पूरी तरह से अकेले पड़ चुके हैं। उनका गर्वर्नेंस मॉडल पूरी तरह से खोखला दिखाई दे रहा है। इसी लिए वो भूमिगत हो गए हैं, क्योंकि उनके पास अब उनके पास कोई राजनीतिक जवाब नहीं है। वो पूरी तरह से एक्सपोज हो गए हैं। यह उनका पैटर्न रहा है। 2014 में जब वो एक भी सीट नहीं जीत पाए थे तो वो पूरी तरह से गायब हो गए थे। यह उनका पैटर्न है। उनकी पार्टी का कोई ब्राइट फ्यूचर नहीं दिख रहा है।
राजकिशोर: पहले जब केजरीवाल बोलते थे तो वो लोग दिखाते थे। वो यह भी तय करते थे कि कौन से पत्रकार उनसे सवाल करेंगे। यहां तक को वो यह भी कहते थे कि अगर फलां व्यक्ति सामने बैठेगा तो मैं सवाल नहीं लूंगा। एक जानकारी और मिल रही है कि अरविंद केजरीवाल की पूरी गैर-राजनीतिक टीम को धीरे-धीरे उन्होंने दिल्ली से पंजाब शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। काडर इस पार्टी के पास नहीं था। अब उनके इम्यूनिटी चाहिए, इसके लिए वो परेशान घूम रहे हैं। अब यह देखना होगा कि केजरीवाल आगे की राजनीति पंजाब से करेंगे कि तिहाड़ से करेंगे यह देखना होगा।
समीर चौगांवकर: दिल्ली में आम आदमी पार्टी को हराकर भाजपा को सबसे ज्यादा राहत मिली होगी। यह जीत भाजपा के लिए बड़ी जीत है। आप एक राष्ट्रीय पार्टी है। अरविंद केजरीवाल एक विकल्प के रूप में उभर रहे थे। अब जिस तरह के परिणाम आए हैं उसके बाद एक के बाद जो कैग की रिपोर्ट आएंगी, उन पर जनता भरोसा करेगी। उससे भाजपा यह साबित करने की कोशिश करेगी कि अरविंद केजरीवाल का दिल्ली मॉडल कितना खोखला था और इसमें कितना भ्रष्टाचार हुआ।
मुझे लगता है कि दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी की साख दांव पर है। भले रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री हैं लेकिन प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री मोदी की दांव पर लगी है। मुझे लगता है कि महिला दिवस के दिन 8 मार्च को दिल्ली सरकार कोई-कोई ना कोई घोषणा जरूर करेगी। जिस तरह से अरविंद केजरीवाल एक कमरे में बंद हो गए हैं वो आम आदमी पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं है।