भारत मंडपम में हुआ एआई शिखर सम्मेलन पूरे हफ्ते सुर्खियों में रहा। कभी सही तो कभी गलत वजहों से। इस पूरे आयोजन के खत्म होते-होते भारतीय युवा कांग्रेस के नेताओं का प्रदर्शन सियासत की सबसे बड़ी वजह बन गया। भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लागने लगे। इस हफ्ते इसी पर 'खबरों के खिलाड़ी' में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार पीयूष पंत, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
पीयूष पंत: प्रदर्शन करने का अधिकार प्रजातंत्र में हर किसी को है। अपनी बात हर कोई रख सकता है, लेकिन जिस तरह से यह प्रदर्शन किया गया वो तरीका सही नहीं था। मुझे लगता है कि अपनी बात कहने का हक सभी को है, फिर भी मैं कहूंगा कि जिस तरह से ये प्रदर्शन किया गया वो सही नहीं था। अगर ऐसे प्रदर्शन जंतर मंतर पर होता तो उसमें कुछ गलत नहीं था। इस घटना से बचा जा सकता था।
अवधेश कुमार: अगर किसी को स्वयं निर्वस्त्र हो कर, देश को निरवस्त्र करने में सम्मान प्रतीत होता है तो उस पर कोई कुछ नहीं कर सकता है। आपको विरोध करने के लिए वही जगह मिली थी? आपको विरोध करना था तो कहीं भी जा सकता था। जंतर मंतर पर जा सकते थे। जो मेहमान या कंपनियां वहां आई थीं वो भारत के लिए आई थीं। इस प्रदर्शन के बावजूद फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत इस वक्त दुनिया को लीड कर रहा है। हम भारत पर भरोसा कर सकते हैं। ज्यादातर कंपनियों का यही कहना था। मैं समझता हूं कि एक ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ है। भारत ने इस सम्मेलन के जरिए एक दृष्टिकोण दिया है।
राकेश शुक्ल: इस पूरे मामले ने कांग्रेस ने आ बैल मुझे मार वाली कहावत को चरितार्थ किया है। पहले जो गलगोटिया की वजह से जो हुआ। उसके बाद इस आयोजन में जो व्यवस्थागत दिक्कतें थीं, इस घटना की वजह से इन सभी चीजों को कांग्रेस ने अपने सिर ले लिया है। प्रदर्शन के लिए उस जगह का चयन करके कांग्रेस ने सही नहीं किया। प्रदर्शन करना विपक्ष का अधिकार है वो कहीं भी प्रदर्शन कर सकते थे, लेकिन ये जगह सही नहीं थी। ये पूरा प्रदर्शन पूर्व नियोजित था। किसी भी राजनीतिक दल में जब कोई प्लान होता है तो वो राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास जाता है। कांग्रेस के मामले में राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे जी हैं और अंतिम मोहर गांधी परिवार लगाता है, इसलिए ये नहीं माना जा सकता है कि इस पूरे प्लान की जानकारी उन्हें नहीं थी।
अनुराग वर्मा: ऐसी शर्मनाक घटना करके हम किसकी मदद करना चाहते हैं। ये कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था। इस घटना के जरिए हमारे देश के लोग किसे फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, ये देखने की जरूरत है। हम एक अल्टरनेट पावर बनना चाहते हैं, क्या उसे डिरेल करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस तरह के प्रदर्शन को देखकर हम कह सकते हैं कि ये कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की खीझ है। कपड़े उतारने का संदेश अलग जाता है। इस सब में जो सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस ने यह किया कि जो सवाल उन्हें पूछना चाहिए था, अब वो उनसे पूछा जा रहा है।
पूर्णिमा त्रिपाठी: गलगोटिया वाली घटना क्यों हुई? जब डीडी ने उसे दिखाया जब मिनिस्ट्री ने उसे ट्वीट किया तब क्या आप सब की आंखों में धूल झोकने के लिए कर रहे थे। फूहड़पन की शुरुआत वहीं से शुरू हो गई थी। जहां तक प्रदर्शन के तरीके की बात है तो मैं उसे गलत मानती हूं। विरोध प्रदर्शन का अधिकार हमारे संविधान ने सभी को दिया है, लेकिन वो प्रदर्शन का तरिका कैसा होगा यह भी देखना होगा। गलतियां दोनों तरफ से हुई हैं। एआई समिट को फेल करने की मंशा से प्रदर्शन किया गया ये मैं नहीं मानती हूं। इस पूरे मामले में देश को जो धब्बा लगा है उसे लेकर सरकार को भी सोचने की जरूरत है और कांग्रेस को भी सोचने की जरूरत है।