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Khabron Ke Khiladi: 'नूंह हिंसा प्रशासनिक के साथ ही मानवीय विफलता', जानें हरियाणा की घटना पर विश्लेषकों की राय

Sat, 05 Aug 2023 05:08 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नूंह में हुए दंगों के बाद अब उनके कारणों का विश्लेषण किया जा रहा है। इसे प्रशासनक की विफलता बताया जा रहा है। वहीं, आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है। इसे लेकर भी लोगों में नाराजगी है। इस मुद्दे पर जानिए 'खबरों के खिलाड़ी' के विश्लेषकों की राय...
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खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश मणिपुर की हिंसा से अब तक उबरा नहीं है कि हरियाणा का मेवात जल उठा। पशु तस्करी के आरोप में दो लोगों की हत्या कर दी गई थी और उसका आरोप कथित गौरक्षक मोनू मानेसर पर लगा। घटना को लेकर तनाव था। इसी बीच, हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा के दौरान मोनू मानेसर ने वीडियो जारी कर इसमें शामिल होने की बात कही। मोनू मानेसर तो यात्रा में नहीं पहुंचा, लेकिन यात्रा के दौरान हिंसा भड़क उठी। कहां चूक हुई और देश क्यों दंगे की आग में जलता है, खबरों के खिलाड़ी की नई कड़ी में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए हमारे साथ मौजूद रहे वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, रुद्र विक्रम सिंह और प्रेम कुमार। पढ़िए मेवात हिंसा पर इनकी चर्चा के कुछ अंश....

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रामकृपाल सिंह
'नूंह की घटना से मैं आहत हूं। यह प्रशासन की विफलता है। जिस तरह से इस पर राजनीति होती है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस दंगे में जो कामगार लोग हैं, वो पीड़ित थे, लेकिन जिन्होंने दंगे कराए, वो बच गए होंगे। दंगे से किसी को फायदा नहीं होता। यूपी में सपा के समय भी मुजफ्फरनगर में ऐसा हुआ। यह गड़बड़ हर पार्टी में हुई।'

पूर्णिमा त्रिपाठी
'राजनीति की वजह से दंगे हो रहे। सरकार रोकना चाहती तो नूंह की घटना को रोका जा सकता था। पर ऐसा नहीं किया गया। ये ध्रुवीकरण का खेल चल रहा है। यह आखिरी है, ऐसा भी नहीं है। यह मैथड ऑफ मैडनेस का उदाहरण है।' 
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रुद्र विक्रम सिंह
'यह प्रशासनिक विफलता होने के साथ-साथ मानवीय विफलता भी है। मेवात के हसन खान ने बाबर और राणा सांगा के बीच लड़ाई में राणा सांगा की ओर से लड़ने का फैसला किया था। आज उसी मेवात में दंगे हो रहे हैं, जो दुखद है। मेवात में मेव मुस्लिमों को गांधीजी ने भी पाकिस्तान जाने से रोका था। दंगों के बाद बुलडोजर का इस्तेमाल कोई विकल्प नहीं हो सकता है। कल को अफसर अपनी खुन्नस निकालने के लिए इसका इस्तेमाल करने लगेंगे। बुलडोजर की प्रक्रिया नहीं अपनानी चाहिए। अगर यही करना है तो अदालतों को बंद कर दीजिए।'

प्रेम कुमार
'नूंह हिंसा में कौन तलवार जुटा रहा था, कौन पत्थर जुटा रहा था, आम आदमी को पता नहीं था। पहली बार हिंदू धर्म के शंकराचार्य खट्टर का इस्तीफा मांग रहे हैं। अगर आप हिंदू धर्म के शंकराचार्य का सम्मान करते हैं तो भाजपा को खट्टर का इस्तीफा लेना चाहिए। हरियाणा में दंगे होते रहे और प्रशासन सोता रहा।' 

विनोद अग्निहोत्री
'दंगों के मामले में गड़बड़ी प्रशासनिक तौर पर तो हुई ही है, बुनियादी तौर पर भी हुई है। मेवाती मुसलमानों का सांप्रदायिक इतिहास कभी नहीं रहा। इसमें मारा गया होमगार्ड मुस्लिम है। उसका नाम नीरज खान है। उसके पिता का नाम चिरंजीलाल खान है। 1947 में जब देश का बंटवारा हुआ, तब यहां के मुसलमानों को पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए गांधीजी ने खुद पहल की। दंगों को रोकने में खट्टर सरकार बुरी तरह से विफल रही। ठीक उसी तरह, जैसे मणिपुर के मुख्यमंत्री वीरेंन्द्र सिंह रहे। सोशल मीडिया पर नफरत फैलायी जाती रही और प्रशासन की साइबर सेल कुछ नहीं कर पाई। एसपी साहब छुटटी पर चले गए। सोशल मीडिया पर कई दिनों से मामला गर्म था। चूंकि चुनाव हैं, इसलिए जो लोग दंगों का फायदा उठाते हैं, वो सक्रिय हो गए। इस्तीफा हल नहीं है, लेकिन ऐसी घटनाओं के लिए एक सीएम की जिम्मेदारी होती है या नहीं। इस मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, तभी सरकार का इकबाल कायम होगा। अब नए जख्म ना पैदा हो, इसकी कोशिश की जानी चाहिए। दुनिया देख रही है कि हिंदुस्तां ऐसा देश है, जहां सभी धर्म जाति के लोग रहते हैं।'
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