'खबरों के खिलाड़ी' की इस नई कड़ी में एक बार फिर आपका स्वागत है। अमर उजाला की खास पेशकश 'खबरों के खिलाड़ी' का सफर 10वें एपिसोड तक पहुंच गया है। इस शो को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। आज एक बार फिर हम हफ्ते की बड़ी खबरों और राजनीतिक घटनाक्रम के सधे विश्लेषण के साथ आपके सामने प्रस्तुत हैं। ये दिलचस्प चुनावी चर्चा अमर उजाला के यूट्यूब चैनल पर लाइव हो चुकी है। इसे रविवार सुबह 10 बजे भी देखा जा सकता है।
कर्नाटक में मतदान होने में 10-12 दिन का समय बाकी है और राजनीतिक पार्टियां चुनाव प्रचार में पूरा जोर लगा रही हैं। अन्य मुद्दे भी चर्चा में हैं, जिनमें जिनमे जंतर-मंतर पर पहलवानों का धरना प्रदर्शन और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग का मुद्दा भी शामिल है।... इन अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए इस बार हमारे साथ कात्यायनी चतुर्वेदी, पंकज शर्मा, हर्षवर्धन त्रिपाठी, रेणु मित्तल, विनोद अग्निहोत्री और सुमित अवस्थी जैसे वरिष्ठ विश्लेषक मौजूद रहे। पढ़िए चर्चा के अंश....
सुमित अवस्थी
'कर्नाटक में चुनाव प्रचार जारी है और जल्द ही वहां मतदान होना है, निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार कर्नाटक का किंग कौन? कर्नाटक में भाजपा की राजनीति लिंगायतों के इर्द-गिर्द घूमती है। वहीं, कांग्रेस में सीएम पद के लिए सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार दावेदार हैं। अब मल्लिकार्जुन खरगे का नाम भी सामने आ रहा है। सवाल उठता है कि क्या इससे कांग्रेस को परेशानी नहीं होगी?'
'2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में सोनिया गांधी ने 'मौत का सौदागर' का बयान दिया था और भाजपा ने उसे ऐसा भुनाया कि कांग्रेस चुनाव हार गई। अब खरगे ने प्रधानमंत्री को लेकर जो टिप्पणी की है, क्या भाजपा उससे फायदा उठा पाएगी, इस पर सभी की निगाहें हैं। भाजपा बूथ मैनेजमेंट, पोल मैनेजमेंट और पोस्ट पोल मैनेजमेंट में माहिर मानी जाती है तो उसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। क्या जेडीएस चुनाव में फैक्टर है और देवेगौड़ा चुनाव नतीजों के बाद किस तरफ जाएंगे, ये भी एक सवाल है।'
'वहीं जंतर मंतर पर महिला खिलाड़ी धरना प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन भाजपा की ऐसी क्या मजबूरी है कि वह बृजभूषण शरण सिंह का इस्तीफा नहीं ले रही है? जांच में सामने आया है कि फेडरेशन में महिला खिलाड़ियों के शिकायत दर्ज कराने की कोई व्यवस्था नहीं है और ना ही कोई विशाखा कमेटी है, तो इसी आधार पर बृजभूषण शरण सिंह का इस्तीफा हो जाना चाहिए कि वह इतने सालों से फेडरेशन के प्रमुख हैं और वह महिला खिलाड़ियों के शिकायत करने की कोई व्यवस्था ही नहीं बना सके हैं'!
पंकज शर्मा
'कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बन रही है। चर्चा इस बात की है वह सबसे बड़ी पार्टी बनेगी या फिर किसी के सहयोग से, लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बन रही है, यह तय है। भाजपा उत्तर भारत में अपनी कमजोर स्थिति को भांप चुकी है और इस वजह से वह दक्षिण में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। लेकिन अगर वह कर्नाटक में हार जाती है तो यह भाजपा की उम्मीदों के लिए बड़ा झटका होगा।'
'मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम के बारे में जो टिप्पणी की, उससे बचना चाहिए था। खरगे पहले भी पीएम मोदी पर टिप्पणी कर चुके हैं और उनकी बातों से अर्थ का अनर्थ हो जाता है। कांग्रेस के लोगों को इससे बचना चाहिए। हालांकि, लोग अब यह जान चुके हैं कि कांग्रेस के लोग ऐसे बयान देते हैं तो भाजपा मुद्दा बनाने की कोशिश करती है। जनता भाजपा के शासन से ऊब चुकी है। फिर चाहे वो केंद्र की सरकार हो या फिर राज्य की। अब तो ऐसा लगता है कि भाजपा के लोग भी भाजपा के शासन से उक्ता चुके हैं।'
'बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना भाजपा की मजबूरी नहीं है, ये उनका माइंडसेट है। भाजपा का माइंडसेट अपने नेताओं का साथ देने का है। महिला पहलवान गंभीर आरोप लगा रही हैं, लेकिन भाजपा यह नहीं समझ पा रही कि इसका असर देश की जनता पर क्या पड़ेगा? जब तक जांच नहीं हो जाती तब तक बृजभूषण शरण सिंह को पद से हटाना चाहिए। एमपी में भी एक मंत्री पर आरोप लगे हैं, लेकिन उस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और भी ऐसे मामले हैं लेकिन यह समाज के लिए चिंताजनक है।'
हर्षवर्धन त्रिपाठी
'कर्नाटक एक ऐसा राज्य है, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए संकट का राज्य है। कर्नाटक में लिंगायत, वोक्कालिगा, कोरबा, मुस्लिम जैसे वोटबैंक में विभाजन है। वहां प्रभुत्व की लड़ाई है और सबके अपने-अपने नेता हैं, ऐसे में अभी कर्नाटक के बारे में अंतिम राय पर नहीं पहुंचा जा सकता। सिद्धारमैया ने लिंगायत में विभाजन की कोशिश की और वह अभी भी कभी ब्राह्मणों और कभी लिंगायतों को लेकर टिप्पणी करते रहते हैं। कांग्रेस को इससे निपटना होगा।'
'भाजपा पहली बार कर्नाटक में लिंगायत की राजनीति से आगे जाने की कोशिश कर रही है। कई वोक्कालिगा भी भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। मुस्लिम आरक्षण को वोक्कालिगा और लिंगायत में बांटना भी भाजपा के लिए अहम साबित हो सकता है। नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है। कांग्रेस कर्नाटक में जीत गई होती तो अमूल बनाम नंदिनी को मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं थी। खरगे को यह टिप्पणी करने की क्या जरूरत थी?'
'बृजभूषण शरण का मामला हो या कोई अन्य मामला, खेल संघों में राजनीति बंद होनी चाहिए। यहां जितने आरोप लगाए उनकी जांच के लिए कमेटी बनाई गई लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। ओलंपिक के लिए क्वालिफाई खिलाड़ी को नेशनल के लिए ट्रायल देने की अनिवार्यता के मामले पर विवाद शुरू हुआ, लेकिन मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए।'
विनोद अग्निहोत्री
'कर्नाटक में भाजपा का कोर वोटबैंक लिंगायत ही रहा है। पिछली बार भी भाजपा 2013 में इसलिए हारी क्योंकि येदियुरप्पा बाहर थे और जब 2018 में भाजपा ने येदियुरप्पा को वापस लिया तो पार्टी की सत्ता में वापसी हुई। कर्नाटक में वोक्कालिगा का वोटबैंक जेडीएस के पास है। अब भाजपा वोक्कालिगा पर दांव लगाने की कोशिश कर रही है। ओल्ड मैसूर में भाजपा वोक्कालिगा वोटबैंक को लुभाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में वहां के नतीजों पर सभी की नजरें रहेंगी। पीएम मोदी की लोकप्रियता ही भाजपा की ताकत है, ऊपर से मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी ने भाजपा को ऊर्जा दे दी है, लेकिन वहीं भाजपा नेता की सोनिया गांधी पर टिप्पणी से मामला उलझ गया।'
'भारत जोड़ो यात्रा के लिए भी कर्नाटक का चुनाव अहम है क्योंकि कर्नाटक में ही भारत जोड़ो यात्रा सबसे लंबे समय तक रही थी और वहां राहुल गांधी को अपार समर्थन भी मिला था। अगर कांग्रेस कर्नाटक में जीतती है तो भारत जोड़ो यात्रा की अहमियत को स्वीकार्यता मिलेगी वरना उसे बेअसर माना जाएगा। कर्नाटक सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं लेकिन सरकार इनसे इनकार करती रही है।'
'कांग्रेस ने व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को स्वीकार किया था। ये राजीव गांधी का साहस था, बाकी प्रधानमंत्री स्वीकार ही नहीं करते। कर्नाटक में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा है लेकिन कर्नाटक में लोग एक फैसला कर लेते हैं, उसी हिसाब से वोट देते हैं। 2014 में पीएम मोदी की लोकप्रियता थी, वह आज भी है, लेकिन 2014 में तो चरम पर थी, तब भी भाजपा कर्नाटक में खास प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। तो ये कर्नाटक का मिजाज है।'
'खेल संघों की राजनीति देश में पुरानी बात है लेकिन कोई महिला किसी राजनेता के कहने से सड़कों पर उतर जाए, मैं ऐसा नहीं मानता। इसलिए जांच होनी चाहिए। जिनका सम्मान खुद प्रधानमंत्री ने किया, उनकी बात गंभीरता से और संवेदनशीलता से सुनी जानी चाहिए। अगर एफआईआर के लिए धरना देना पड़े तो यह गलत है। दरअसल इस्तीफा ले लेते हैं तो वह भ्रष्टाचार की स्वीकार्यता हो जाती है इसलिए भाजपा में इस्तीफे नहीं होते।'
कात्यायनी चतुर्वेदी
'जेडीएस की कोशिश है कि वह कर्नाटक में किंगमेकर बने। भाजपा ने जिस तरह से टिकटों का बंटवारा किया, नए चेहरों पर दांव लगाया और हर सीट का मैनेजमेंट करने की कोशिश की। यह भाजपा की ताकत है और गुजरात में भी ऐसा देखा गया था। कांग्रेस आत्ममुग्धता का शिकार तेजी से होती है। ऐसे में अभी से ये मानना कि कांग्रेस की सरकार बन रही है, जल्दबाजी होगा। डबल इंजन की सरकार ने विकास किया है और कर्नाटक की जनता विकास के मुद्दों को अहमियत देती है।'
'खिलाड़ियों के मामले में सरकार कार्रवाई करेगी और हमें धैर्य रखना चाहिए। असम में कांग्रेस कार्रवाई नहीं कर रही है और उत्पीड़न को शाब्दिक बताया जा रहा है, लेकिन यह गलत है। महिलाओं का किसी भी तरह का उत्पीड़न गलत है और इसे शाब्दिक कहकर अपना पल्ला झाड़ना गलत है।'
रेणु मित्तल
'कर्नाटक में भाजपा के खिलाफ बहुत नाराजगी है और कांग्रेस से ज्यादा लोग भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। कर्नाटक में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा है। सिद्धारमैया सीएम पद के तगड़े दावेदार हैं और बहुत समय बाद कांग्रेस संगठित होकर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस के लिए कर्नाटक की जीत बेहद जरूरी है। भाजपा जिस तरह से चुनाव प्रचार में तेजी ला रही है, उससे उनकी व्याकुलता दिखती है। जहां तक जेडीएस का सवाल है तो वह एक अहम फैक्टर है। जेडीएस का अपना वोटबैंक है और देवेगौड़ा कहीं भी जा सकते हैं। भाजपा भी चाहती है कि जेडीएस की ज्यादा सीटें आएं जिससे भाजपा को फायदा मिले।'
'महिला पहलवान अगर आरोप लगा रही हैं तो ऐसा नहीं लगता कि वह राजनीति के तहत है। सरकार बच्चियों को बचाने की बात करती है, लेकिन महिला पहलवानों के मामले में ऐसा नहीं दिख रहा है। अदाणी मामले में भी पीएम मोदी ने कोई बयान नहीं दिया। देश का नेता होने के नाते पीएम मोदी को बयान देना चाहिए, लेकिन पीएम की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।'