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खबरों के खिलाड़ी: योगी ने अभी क्यों दिया हलाल पर बयान, विश्लेषकों ने बताया बिहार चुनाव से इसका क्या जुड़ाव?

Sat, 25 Oct 2025 04:57 PM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि हलाल सर्टिफिकेशन का सारा का सारा पैसा आतंकवाद के लिए, लव जिहाद के लिए और धर्मांतरण में दुरुपयोग होता है। हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर भारत के ग्राहकों का शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बिहार चुनाव के बीच उनके इस बयान पर सियासत हो रही है। इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में योगी के इसी बयान पर चर्चा हुई। पढ़ें विश्लेषकों की राय... 

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खबरों के खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यूपी में हलाल सर्टिफिकेशन पर पूरी तरह से रोक है। उत्तर प्रदेश में कोई भी संस्था हलाल सर्टिफिकेट लगाकर अपने प्रोडक्ट नहीं बेच पाएगी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुझे लगता है यूपी में कोई उसे खरीदने या बेचने का दुस्साहस नहीं करेगा, लेकिन आप आश्चर्य करेंगे कि साबुन का भी हलाल, कपड़े का भी हलाल। योगी के इस बयान पर  विपक्षी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि ये बिहार में चुनाव होने की वजह से दिया गया है। योगी आदित्यनाथ के इस बयान पर ही इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, राकेश शुक्ल, अजय केडिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। 

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राकेश शुक्ल: भारत का कोई भी व्यापारी चाहे हिंदू हो या मुस्लिम अगर वो हलाल सर्टिफिकेट नहीं लेता है तो अरब देशों में वो अपना सामान नहीं बेच सकता है। ये तथ्य है। इस सर्टिफिकेट का पैसा कहां जा रहा है। ये सोचने वाली बात है। इससे होने वाली कमाई कहां इस्तेमाल हो रही है ये भी देखने वाली बात है। योगी आदित्यनाथ की तरफ से जो हलाल सर्टिफिकेट की बात कही गई है, उस पर मैं कहूंगा कि भारत सरकार को इस पर कदम उठाना चाहिए। 

अनुराग वर्मा: इसका व्यवहारिक पहलू देखा जाए तो खाने पाने की चीजों में तो हलाल सर्टिफिकेशन समझ में आता है। बाकी की चीजों में इसका क्या मतलब है ये कहीं से समझ नहीं आता है। धर्म के आधार पर पैसों की एक बहुत बड़ी किटि बन रही है। हो सकता है कि कुछ कंपनियां जो इस पैसे से फायदा पा रही हैं वो  इसका इस्तेमाल किसी गलत चीज में कर रही हों। कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब आपने कैब बुक करी और ड्राइवर दूसरे धर्म का निकला तो आपने राइड कैंसल कर दी तो उस पर बवाल होता है। अगर ये गलत है तो फिर हलाल दिया, माचिस बेंचना कहां से सही है?  

अजय केडिया: उत्तर प्रदेश में 2023 में इसे बैन कर दिया गया था। आज इसे कहा गया है तो निश्चित रूप से ये राजनीतिक दृष्टि से कहा गया होगा। क्योंकि बिहार में चुनाव है। सवाल ये उठता  है कि दो प्राइवेट संस्थाएं हो जो इसका सर्टिफिकेट देती हैं। एक प्रोडक्ट को सर्टिफिकेट देने का 21 हजार रुपये लेती हैं। ये पैसा कहां जाता है। खाने-पीने के अलावा हर चीज पर हलाल लिखना एक बिजनेस बन गया है। इस तरह का सर्टिफिकेशन कौन देगा यह तय होना चाहिए। 

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रामकृपाल सिंह: भाजपा के पास जहां-जहां पांच सौ के नोट हैं वो उन्हे वहां चलाएगी। उन जगहों पर वो फुटकर पर क्यों निर्भर होगी। ये बात मैं योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता के संदर्भ में कह रहा हूं। जहां तक हलाल की बात है तो किसी भी चीज का गलत तरीके से उपयोग होना कानून के हिसाब से दंडनीय है। कुछ चीजों को अंतिम नतीजे तक ले जाने पर फायदा नहीं होता सियासत में हलाल और झटका भी इस तरह का मामला है।


 
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