उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट शुरू हो गई है। राज्य में अगले साल के शुरुआत में चुनाव होने हैं पर सियासी दलों ने अभी से इसकी तैयारी शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी सिंतबर तक सभी तैयारियां पूरी करने की बात कर रही है। कांग्रेस बराबरी से लड़ाई की बात कर रही है। वहीं, राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर भी सियासी बयानबाजी जारी है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और मिहिर रंजन मौजूद रहे।
राम कृपाल सिंह: आज उत्तर प्रदेश में जो कुछ भी हो रहा है। उसमें एक अल्ट्रा राइट विंग का आदमी बिना कुछ बोले समाजवाद की जितनी बातें हैं उन्हें जमीन पर लागू कर रहा है। आज सारे समाजवादी राम भक्त हो गए। एक कांग्रेस ही डिलेमा में है। राजनीति में अगर कोई आया है तो ये देखेगा कि चलो आज तो ठीक है, लेकिन कल क्या होने वाला है, वो उसे भी देखेगा। मुझे ऐसा लगता है कि जो तीन राज्यों में हुआ है अगर उत्तर प्रदेश के वही परिणाम आ जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
मिहिर रंजन: अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि सितंबर तक सारी तैयारी कर लीजिए। यहां पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस साथ आ सकते हैं। दोनों चढ़ावा चोरी का मामला जनता के बीच ले जाएंगे। बिहार में आखिरी मौके तक सीटें तय नहीं हुईं। उसका नतीजा हम सबके सामने है। 2022 में प्रियंका गांधी ने लड़की हूं, लड़ सकती हूं का नारा दिया था। नतीजा क्या रहा था हमने देखा था। 2014 के बाद से भाजपा की सीटें हर चुनाव में कम हुई हैं और उसका गेन सपा को हुआ है। 2027 के चुनाव में अगर भाजपा से अखिलेश को मुकाबला करना है तो पहले उन्हें कांग्रेस से चीजें साफ करनी होंगी।
पूर्णिमा त्रिपाठी: कांग्रेस की समस्या यही है कि हर चुनाव में आखिरी वक्त तक उनकी निगोसिएशन चलती रहती है। कांग्रेस के प्रभारी कह रहे हैं कि हम बराबरी के पार्टनर हैं, लेकिन किस तरह से हैं कोई ये समझा सकता है? 399 सीटों पर 2022 में लड़कर आप दो सीटें जीते थे। अगर सहमति से दोनों चुनाव में जाते हैं और कांग्रेस 80 से 100 सीटों पर मान जाती है तो मुद्दा बहुत बड़ा है और इससे भाजपा को खतरा हो सकता है। 2027 के चुनाव में चढ़ावा चोरी मुद्दा रहेगा।
राकेश शुक्ल: मूल मुद्दा दुख और सुख का है। समाजवादी पार्टी के लोगों को लगता है कि अखिलेश यादव आ जाएंगे तो हमारे दुख सुख में बदल जाएंगे। योगी आदित्यान के वक्त में जो लोग सुखी हैं उन्हें लगता है कि अगर अखिलेश आ जाएंगे तो हमारे लिए दुख आ जाएगा। अब किस वर्ग के लोग ज्यादा हैं वो नतीजे तय करेंगे। मुझे लगता है कि चढ़ावा चोरी चुनावी मुद्दा नहीं बन पाएगा। क्योंकि जो लोग चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं वो जनता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं।
विनोद अग्निहोत्री: बराबरी की बात करना या सीटों का दावा करना एक तरह की पोश्चरिंग है। बिहार और उत्तर प्रदेश में थोड़ा सा फर्क है। कांग्रेस जानती है कि समाजवादी पार्टी के साथ जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। चुनाव मिलकर लड़ना है ये सपा और कांग्रेस दोनों जानते हैं। कांग्रेस चाहती है कि दलित वोट वापस उसके पास लौटे। सपा जानती है कि कांग्रेस साथ रहेगी तो अपर कास्ट का वो वोटर जो भाजपा से नाराज है वो कांग्रेस के चलते उसके साथ जुड़ सके। सपा अपने ब्राह्मण नेताओं को आगे कर रही है। अगर अखिलेश गैर यादव पिछड़े वोट और कुछ ब्राह्मण वोट अपने साथ जोड़ पाए तो भाजपा को चुनौती दे पाएंगे।