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खबरों के खिलाड़ी: 2029 में चुनाव, तमिलनाडु में अभी से पीएम चेहरे पर घमासान, विश्लेषकों ने समझाया असली गणित

Sat, 12 Sep 2026 05:40 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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तमिलनाडु की सियासत में 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासी बयानबाजी तेज है। तमिलगा वेत्रि कझगम (टीवीके) की ओर से पार्टी प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदार के तौर पर पेश किया जा रहा है। वहीं, कांग्रेस 2029 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार बता रही है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और राकेश शुक्ल मौजूद रहे। 
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पूर्णिमा त्रिपाठी: ये अभी से सोचना थोड़ा ज्यादा महत्वाकांक्षी है। फैन फॉलोविंग की वजह से राष्ट्रीय राजनीति में किसी नेता को स्थापित होते हमने नहीं देखा। चाहे एमजीआर हों, जयललिता हों या एनटीआर हों। विजय उस परंपरा को कैसे तोड़ देंगे ये मुझे नहीं पता। कहने को उनके विधायक कुछ भी कह दें। चर्चा करने के लिए भले ये विषय बढ़िया हैं, लेकिन ऐसा होने जा रहा है इसकी मुझे उम्मीद नहीं दिखती है। 

रामकृपाल सिंह: बंगाल का चुनाव होने से पहले राहुल की सबसे बड़ी विरोधी ममता बनर्जी थीं। हर आदमी पहली बार ही बनता है। नरसिम्हा राव दक्षिण से होकर भी प्रधानमंत्री बन जाएंगे ये किसी को नहीं पता था। तो फिर विजय नहीं बन पाएंगे ये कौन कह सकता है। मूल बात ये है कि राहुल गांधी की विपक्षी गठबंधन में कितनी स्वीकार्यता है ये भी देखना होगा। 
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राकेश शुक्ल: सबसे पहले हमें यह समझना चाहिए कि ये मांग कहां से उठी। जब कांग्रेस डीएमके का गठबंधन छोड़कर टीवीके के साथ जाती है तो बहुत तीखी प्रतिक्रिया होती है। विपक्षी गठबंधन में स्थिति एक अनार, सौ बीमार वाली है। आज की तारीख में मैं ये मानकर चलता हूं कि अगर गैर भाजपा सरकार बनेगी तो बिना कांग्रेस के गठबंधन के नहीं बनेगी। दूसरा इस स्थिति में कांग्रेस को कम से कम 150 सीटें जीतनी पड़ेगी। और अगर कांग्रेस 150 सीटें जीतेगी तो वो विजय थलपति को क्यों प्रधानमंत्री बनने देगी। 

विनोद अग्निहोत्री: चुनौती नेता की नहीं होती है, चुनौती परिस्थितियां होती हैं। 2029 के लोकसभा चुनाव में क्या परिस्थिति बनेगी ये हम अभी से नहीं बता सकते हैं। अभी की परिस्थिति की बात करें तो आज की तारीख में मौजूदा केंद्र सरकार कहीं नहीं जा रही है। मुझे लगता है कि डीएमके को जिस तरह से छोड़ा गया वो बहुत गलत तरीका था। हर क्षेत्रीय पार्टी का कार्यकर्ता अपने नेता को प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहता है इसमें कुछ गलत भी नहीं है। विपक्षी गठबंधन किसी को प्रोजेक्ट नहीं करेगा। ये जरूर है कि ख्वाब देखना सभी का हक है।
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