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Khabaron Ke Khiladi: राज्यसभा चुनाव में जमकर हुई क्रॉस वोटिंग, विश्लेषकों ने बताया विधायकों के इस रुख का कारण

Sat, 21 Mar 2026 05:02 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

राज्यसभा चुनाव में जमकर क्रॉस वोटिंग हुई। वहीं, कुछ विधायक अपने उम्मीदवार को वोट देने ही नहीं पहुंचे। ओडिशा और बिहार में ये क्रास वोटिंग विपक्षी उम्मीदवारों की हार की वजह बन गई। हरियाणा में कांग्रेस का उम्मीदवार हारते-हारते जीत गया। वरिष्ठ पत्रकारों से जानें राज्यसभा चुनाव नतीजों का विश्लेषण…

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खबरों के खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में जमकर क्रॉस वोटिंग हुई। ओडिशा, बिहार से लेकर हरियाणा तक में क्रॉस वोटिंग या अनुपस्थित रहने वाले लगभग सभी चेहरे कांग्रेस के थे। राज्यसभा के ये चुनाव कांग्रेस के लिए क्या संदेश दे गए? इसी पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, अवधेश कुमार, अजय सेतिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।

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रामकृपाल सिंह: हमेशा सूरज ही क्यों धरती को घुमाता है। कभी धरती क्यों सूरज को नहीं घुमाती। इसकी वजह है कि जो ताकतवर होता है वही दूसरों को घुमाता है। राज्यसभा चुनाव के दौरान यही ओडिशा में हुआ, यही बिहार में हुआ। नेता तात्कालिक फायदे के हिसाब से फैसले लेते हैं। इसके चलते विचारधारा कई बार हाशिये पर चली जाती है।  

अजय सेतिया: तीनों ही राज्यों में कांग्रेस के ही विधायकों ने या तो क्रॉस वोटिंग की है या फिर मतदान से अलग हो गए। इन तीनों ही राज्यों में मुस्लिम विधायकों ने भाजपा के पक्ष में अहम भूमिका निभाई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश किस दिशा की ओर जा रहा है। चुने हुए विधायक यह महसूस करते हैं कि अगर हमें अपने क्षेत्र का विकास करना है तो उन्हें सत्ताधारी पार्टी के साथ जाने में लाभ है। 

अवधेश कुमार: तीनों ही राज्यों में जो हुआ उसमें से हरियाणा में जो हुआ वह महत्वपूर्ण था। ओडिशा में हुआ चुनाव कांग्रेस की दयनीय स्थिति को उजागर करता है। पार्टी जब कमजोर हो जाती है तब आप अगर उम्मीदवार मन का नहीं देते हैं तो इस तरह की स्थिति होती है। बिहार में चार विधायक अनुपस्थित रहे। केवल यह नहीं है कि उन्हें खरीद लिया गया है। नेता को राज्य में राजनीति करनी है। मेरी पार्टी का राज्य में उस तरह का भविष्य नहीं दिख रहा है तो नेता इस तरह के फैसले लेता है। 

पीयूष पंत: ये सही है कि अगर कोई पार्टी केंद्र में मजबूत नहीं है तो इस तरह की स्थितियां बनती हैं। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व बहुत कमजोर हो चुका है। हरियाणा में हम देख रहे हैं। ओडिशा में हमने देखा। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व समय पर एक्शन नहीं लेता इस वजह से इस तरह की स्थितियां बनती हैं। 

अनुराग वर्मा: ओडिशा में सोफिया फिरौदस ने भी कांग्रेस की लीडरशिप को नकार दिया। ये एक बार फिर दिखा है कि कांग्रेस की लीडरशिप पार्टी चलाने में सक्षम में नहीं है। कांग्रेस के नेता अपना भविष्य तलाश रहे हैं। लोगों ने इस चुनाव में अपना राजनीतिक भविष्य अपने हिसाब से तय करना शुरू कर दिया है। 

विनोद अग्निहोत्री: ये विचार का नहीं बाजार का युग है। अब हर कोई अपना और अपना राजनीतिक हित सबसे पहले देखता है। जहां कांग्रेस का वोट भाजपा से ज्यादा था वहां भाजपा की सरकार बन जाती है और कांग्रेस तीसरे नंबर पर चली जाती है। ऐसी स्थिति में जीतने वाले अपनी ताकत से जीतते हैं। ऐसे में जो विधायक ओडिशा में जीतकर आए उन्होंने अपना हित देखा। उन्हें सत्ता के साथ जाने में फायदा दिखा।

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