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Khabaron Ke Khiladi: ऑपरेशन सिंदूर पर जारी सियासत में पक्ष या विपक्ष कौन भारी? बता रहे हैं खबरों के खिलाड़ी

Sat, 07 Jun 2025 09:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरकार के कदमों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप पर ही इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अजय सेतिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।  
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खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऑपरेशन सिंदूर को आज एक महीने पूरे हो गए हैं। अब भी इसे लेकर सियासत जारी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भोपाल में दिए एक बयान ने बीते हफ्ते सबसे ज्यादा सुर्खियां बंटोरीं। सत्ता पक्ष राहुल पर पाकिस्तान का प्रवक्ता होने आरोप लगा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी इसी आरोप-प्रत्यारोप पर ही इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अजय सेतिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।  
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राकेश शुक्ल: मूल प्रश्न यह है कि सरेंडर जैसे शब्द का इस्तेमाल करने से पहले हमें यह सोचना चाहिए था कि हमारा इतिहास बहुत अच्छा नहीं रहा है। राहुल गांधी का यह बयान सेल्फ गोल नहीं है, बल्कि यह तो राष्ट्र के लिए सेल्फ गोल है। इसका दीर्घकालिक परिणाम भारत के लिए घातक है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: जिस भाषा में इस पूरे मामले को प्रस्तुत किया जा रहा है कि वह बहुत की निंदाजनक है। मैं इस तरह की भाषा का समर्थन नहीं करती हूं। लेकिन असल सवाल एक महीने बाद भी मुंह बाए खड़ें हैं। क्या देश के लोगों को यह जानने का हक नहीं है। आपके नेता विदेश जाकर बता सकते हैं, सीडीएस सिंगापुर जाकर कुछ नई बातें बता सकते हैं तो देश के लोगों को जानने का हक क्यों नहीं है? अगर यह सच में किसी के दबाव में हुआ तो यह हमारी विदेश नीति के लिए बहुत बड़ा धक्का है। राहुल गांधी के सवाल वाजिब हैं, लेकिन जिस भाषा में किए जा रहे हैं मैं उसका समर्थन नहीं करती हूं। 

अजय सेतिया: विदेश मामलों की स्थाई समिति की बैठक बुलाई गई। उसके माध्यम से विपक्ष के पास पूरी जानकारी जा चुकी है। मुझे नहीं लगता है कि कुछ छुपाया गया है। जो डीजीएमओ ने 10 तारीख को बताया था, वही सिंगापुर में सीडीएस ने बताया है। विपक्ष के नेता जब यह सवाल उठाते हैं कि हमारे कितने विमान गिरे तो क्या उन्हें ये सवाल नहीं पूछना चाहिए कि पाकिस्तान के कितने विमान गिराए गए उसकी जानकारी दीजिए। जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है वो बताता है कि देश में सियासत का स्तर कितना गिर गया है। 

अनुराग वर्मा: इस डेलिगेशन में जिस तरह से लोग (कांग्रेस नेता) बातें कर रहे हैं। उससे साफ-साफ दिख रहा है कि उनका झुकाव बदल चुका है। इससे ऐसा लगता है कि कहीं कांग्रेस एक नए विघटन की ओर तो नहीं बढ़ रही है। 
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समीर चौगांवकर: ऑपरेशन सिंदूर से एक बात साफ हो गई है कि देश में कैसी भी स्थिति हो राजनीतिक दल इस पर सियासत जरूर करेंगे। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष हो। जब सर्वदलीय बैठक हुई तो उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शामिल होना चाहिए था। इसी तरह जो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे गए उनमें नेता विपक्ष राहुल गांधी को भी शामिल किया जाता तो शायद बेहतर संदेश जाता। हर चीज में यह कहना कि सेना का अपमान हो रहा है यह भी ठीक नहीं है। अगर विजय शाह का बयान हो जाता तब ऐसा कहा जाता तो शायद बेहतर संदेश जाता। विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी को भी इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए था।
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