इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में इसी मुद्दे पर चर्चा हुई। चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री अवधेश कुमार और विजय त्रिवेदी मौजूद रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ के अलावा भारत की अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी को लेकर भी चर्चा में हैं। उन्होंने 'डेड इकॉनमी' बताते हुए भारत और रूस पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई। इसी बीच ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ सहमति जताई। इसके बाद भाजपा ने राहुल पर देशविरोधी रुख रखने का आरोप लगा दिया। इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में इसी मुद्दे पर चर्चा हुई। चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री अवधेश कुमार और विजय त्रिवेदी मौजूद रहे।
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विजय त्रिवेदी: भारत के एक नेता, खासकर अगर वह नेता लोकसभा में विपक्ष के नेता हों तो उन्हें भारत का सम्मान रखना सबसे जरूरी है। लेकिन उससे इतर एक बात यह भी है कि तथ्यात्मक तौर पर भी यह सही नहीं है कि भारत की इकोनॉमी डेड है। डेड इकोनॉमी का मतलब है कि ग्रोथ रेट कम है। लेकिन अगर भारत में इन तथ्यों को देखा जाए तो समझ आता है कि चाहे निर्यात की बात हो या मेक इन इंडिया हो या रक्षा उत्पादों के निर्यात की बात हो यह सब बढ़ा है। तथ्यात्मक तौर पर भले ही देश की आर्थिक विकास दर दो अंकों में नहीं है, लेकिन यह डेड नहीं है। आप विपक्ष के नेता हैं, कांग्रेस पार्टी के नेता हैं तो हो सकता है कि आप सरकार के पक्ष से सहमत न हों, लेकिन जब विदेश के नेता और भारत के नेता की बात हो तो हमें क्यों नहीं देश के नेता पर भरोसा करना चाहिए। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अपनी जगह है।
रामकृपाल सिंह: राहुल गांधी मुझे डोनाल्ड ट्रंप की तुलना में बेहतर अनुशासन बरतते नजर आते हैं। लेकिन राहुल जी ने जो कहा वह पिछले 11 साल से यही कह रहे हैं। तो अगर 11 साल से वे जो चिल्ला कर कह रहे हैं, वो अचानक ट्रंप के बयान पर उसका उलट बोल देते तो ऐसा नहीं हो सकता। राहुल और कांग्रेस के सारे बड़े नेता कहते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था रसातल पर चली गई है, तबाही है, बर्बादी है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह सही है या गलत है। लेकिन विपक्ष के वरिष्ठ नेता हैं, वो लगातार अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक बयान दे रहे हैं। इसलिए ट्रंप के ऐसे बयान देने पर राहुल उनकी बात को नकार तो नहीं देंगे।
विनोद अग्निहोत्री: डोनाल्ड ट्रंप ने दरअसल राहुल गांधी की उस बात का समर्थन किया है, जिसे वह लंबे समय से उठाते रहे हैं। व्यक्तिगत तौर पर मैं नहीं मानता कि भारत की अर्थव्यवस्था डेड है। अगर 6.5 फीसदी ग्रोथ हो रही है तो यह डेड नहीं है। हालांकि, मनमोहन सरकार में इतनी ही औसत विकास दर को खराब कहा गया था। तब दुनियाभर में डंका पीट पीटकर कहा गया था कि भारत की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है, तब वह राष्ट्र के खिलाफ नहीं था, वह मनमोहन सरकार के खिलाफ था। तब पॉलिसी पैरालिसिस का मुद्दा उठाया गया था। डेड इकोनॉमी और पॉलिसी पैरालिसिस पर्यायवाची हैं। भारत की अर्थव्यवस्था को डेड कह कर ट्रंप ने हमारा अपमान किया है, लेकिन राहुल अगर अपनी ही बात का विरोध कर ट्रंप के बयान को गलत कहेंगे तो सत्तापक्ष को मौका मिल जाएगा कि कल तक विपक्ष हमारी अर्थव्यवस्था को खराब कह रहा था, आज वह भी अच्छा कह रहा है।
अवधेश कुमार: राहुल गांधी के लिए भारत के किसी भी गौरवगान को स्वीकार करना और विदेश से आलोचना हो तो राजनीति छोड़कर देशहित में खड़ा होना, जिस दिन वे यह करेंगे उस दिन मुझे सोचना पड़ेगा कि क्या यह राहुल गांधी ही हैं। इसलिए मुझे उनके बयान से आश्चर्य नहीं हुआ है। हालांकि, भारत इस वक्त जिस तरह से खड़ा हो रहा है, इसलिए डोनाल्ड ट्रंप का जो रवैया है, वह संकट में सुअवसर की तरह है।