फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Khabaron Ke Khiladi: बिहार में राहुल की ‘वोट अधिकार यात्रा’, विश्लेषकों ने बताया चुनाव पर इसका कैसा होगा असर

Sat, 16 Aug 2025 05:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

राहुल गांधी की यात्रा 17 अगस्त से शुरू होकर 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक रैली के साथ समाप्त होगी।
विज्ञापन
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का हवाला देकर राहुल गांधी बिहार में 'वोट अधिकार यात्रा’ निकालने जा रहे हैं। यह यात्रा 17 अगस्त से शुरू होकर 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक रैली के साथ समाप्त होगी। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राहुल की इस यात्रा के क्या मायने हैं? राहुल की यात्रा से कांग्रेस को बिहार में क्या लाभ हो सकता है? कांग्रेस की यात्रा में बाकी गठबंधन के सहयोगियों की पर क्या असर पड़ सकता है? कुछ ऐसे ही सवालों पर इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई।  चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। 
विज्ञापन




विनोद अग्निहोत्री: इस यात्रा का जो भी लाभ होगा वो बिहार में उनके गठबंधन को होगा। मुझे नहीं लगता है कि इससे तेजस्वी यादव को नुकसान होगा। भारत जोड़ो यात्रा के बाद कांग्रेस को लाभ हुआ। इसके बाद राहुल गांधी को यात्रा भाने लगी है। इसीलिए वो बिहार में ये यात्रा निकालने जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने जो संविधान का नरेटिव गढ़ा उसका उसे फायदा हुआ। ये भाजपा भी मानती है भले वो इसे फॉल्स नरेटिव कहती है। अब वोट चोरी का नरेटिव गढ़ने की कोशिश है। ये एक नया नरेटिव राहुल बना रहे हैं। जो कि संविधान से ही जुड़ा हुआ है। मुझे लगता है कि चुनाव आयोग एसआईआर पर आगे बढ़ेगा और राहुल गांधी इस मुद्दे को आगे लेकर जाएंगे। 
 

रामकृपाल सिंह: रजानीति में अगर आप बदलाव चाहते हैं तो एक सकरात्मक नरेटिव के साथ आपको आना होगा। 1971 में इंदिरा ने गरीबी हटाओ का नारा दिया, जेपी आंदलोन के दौर में जेपी ने भावी इतिहास हमारा है का नारा दिया, अच्छे दिन का नारा भी ऐसा है। ये सभी पॉजिटिव नरेटिव थे। वोट चोरी मुझे ऐसा नहीं लगता है। मेरा मानना है कि बदलाव के लिए पॉजिटिव नरेटिव काम करता है। 

अवधेश कुमार: जितना एसआईआर पर शोर दिल्ली में क्या उतना शोर बिहार में कहीं दिखाई दे रहा है, ये देखना होगा। आप यात्रा कर सकते हैं, कांग्रेस की समस्या यह है कि कांग्रेस इस बात का मूल्याकंन नहीं कर पा रही है कि बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में उसका जनाधार क्यों खत्म हो गया। क्या चुनाव आयोग के विरुद्ध अभियान चालने से कांग्रेस पार्टी के वोटर वापस आ जाएंगे। जब जमीन पर मुद्दा ही नहीं उसे लेकर आप यात्रा कर रहे हैं।  
विज्ञापन

पूर्णिमा त्रिपाठी: राहुल गांधी ने जो पोस्ट डाली है उसमें वो लोग हैं जिनका नाम कट गया है। चुनाव आयोग ने उन्हें मृत बताकर वोट काट दिया। इसके पहले के बयान देख लीजिए जो राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट का मुद्दा उठाया था। उसमें भी उन्होंने चुनाव आयोग का ही डाटा निकाला था। जहां तक शपथ पत्र देने की बात कही जा रही तो अनुराग ठाकुर से शपथ पत्र क्यों नहीं मांगा गया। उन्हें तो इतनी जल्दी इतनी सारी सीटों की डीटेल कैसे मिल गई। इससे यह लगता है कि दाल में कुछ काला है।   

अनुराग वर्मा: राहुल गांधी के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वो विपक्ष के गठबंधन का प्रधानमंत्री पद का दावेदार या यूं कहें कि वो विपक्षी गठबंधन के निर्विवाद नेता बनने के लिए बेचैन दिखने लगे हैं। इस मुद्दे को राहुल गांधी इतनी जल्दी नहीं छोड़ने वाले हैं। राहुल गांधी जो ठान लेते हैं वो करके दिखाते हैं भले ही उसका उन्हें ही नुकसान क्यों न हो जाए। जिस तरह से 2019 के चुनाव में मतदाताओं ने चौकीदार चोर है के नारे को नकारा था, उसे देखकर लगता है कि वोट चोर, गद्दी छोड़ का नारा भी उनके खिलाफ जा सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें