फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Khabaron Ke Khiladi: बिहार में चुनावी हलचल जारी, विशेषज्ञों ने बताया दोनों गठबंधन में किसका अंतर्विरोध भारी

Sat, 31 May 2025 05:10 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर वादा निभाने की बात कही है, तो वहीं तेजस्वी यादव अपने उपमुख्यमंत्री रहने के दौरान के कामों को गिनाने में जुटे हैं। इस राजनीतिक हलचल पर ही इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई।
विज्ञापन
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार में साल के अंत में चुनाव होने हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बिहार की सियासत में चुनावी पारा चढ़ा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ताबड़तोड़ राज्य का दौरा कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के पहले भी पीएम बिहार गए थे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर वहां पहुंचे। प्रशांत किशोर एक नया विकल्प बनने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं नीतीश कुमार अगड़ों को जोड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं। उधर, राजद सत्ता पक्ष को घेरने में लगा हुआ है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी और अवधेश कुमार मौजूद रहे।
विज्ञापन


 

पूर्णिमा त्रिपाठी: बिहार हमेशा चुनावी मोड में रहता है। वहां राजद की राजनीति अपनी जगह है तो भाजपा की राजनीति अपनी जगह है। इन सबके बीच भाजपा और जदयू के बीच आपसी खींचतान भी जारी है। नीतीश कुमार द्वारा अगड़ा आयोग का पुनर्गठन इसी खींचतान का नतीजा है। प्रशांत किशोर चुनावी राजनीति में कितना सफल होंगे ये अभी नहीं कहा जा सकता है। राजद एंटी-भाजपा और एंटी-जदयू की राजनीति में लगी हुई है।
Trending Videos

रामकृपाल सिंह: एक तरफ भाजपा और जदयू में आपसी खींचतान जारी है तो दूसरी तरफ कांग्रेस और राजद के बीच भी उतनी ही खींचतान हो रही है। बिहार राजनीतिक रूप से जागरूक वर्ग है। सीटों का बंटवारा जब होगा तब ये आपसी अंतर्विरोध खुलकर सामने आएगा। मुझे लगता है कि ये अंतर्विरोध राजद और कांग्रेस गठबंधन में ज्यादा दिखाई देगा। 

अवधेश कुमार: तेज प्रताप यादव के मामले में जो कुछ हुआ वह एक बड़ा प्रश्न है। लालू यादव ने एक नैतिक स्टैंड लिया। लेकिन किसी को घोषित कर देने से कोई बाहर होता नहीं है। यह आंख पोंछने वाली बात है। सामाजिक न्याय का तकाजा था कि लालू यादव और राबड़ी देवी को उन लड़कियों के साथ खड़ा होना चाहिए था। प्रधानमंत्री मोदी बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश गए हैं तो उन्होंने तीनो जगह हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट दिए हैं। प्रधानमंत्री अगर जा रहे हैं तो किसलिए गए। यह तो बिहार को तय करना है कि क्या करना है? प्रशांत किशोर इस समय एक फैक्टर हैं। अगर वो वोट काटेंगे तो दोनों तरफ के काटेंगे। 
विज्ञापन

विनोद अग्निहोत्री: प्रधानमंत्री की रैलियां और दौरे सिर्फ बिहार के लिए नहीं हो रहे हैं। बिहार के चुनाव के तत्काल बाद बंगाल, तमिलानाडु और असम जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं। बिहार में अगर आज की तारीख में बात करेंगे तो अभी की एनडीए का पलड़ा भारी है। पिछली बार एनडीए में ज्यादा संकट था। नीतीश कुमार के खिलाफ चिराग पासवान ने झंडा बुलंद किया हुआ था। जहां तक लालू परिवार की बात है तो वहां भी सत्ता संघर्ष खुलकर है। तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच तो है तो तेजस्वी और मीसा में भी है। 

समीर चौगांवकर: मुझे लगता है कि राजद और कांग्रेस के मुकाबले एनडीए में ज्यादा संकट है। राजद-कांग्रेस गठबंधन में एकदम साफ है कि तेजस्वी ही इसके नेता होंगे। सबसे बड़ी चुनौती तो नीतीश कुमार को लेकर है। प्रशांत किशोर ये चुनौती दे रहे हैं कि क्या भाजपा यह एलान करेगी कि सीटें कितनी भी आएंगी नीतीश कुमार ही हमारे मुख्यमंत्री बनेंगे। नीतीश कुमार का जो स्वास्थ्य है क्या उनको मुख्यमंत्री के रूप में पार्टी लेकर जाएगी। क्या चिराग पासवान जिन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ उम्मीदवार दिए वो नीतीश जो सीटें देंगे उस पर मान लेंगे। अगर आप जंगलराज के 15 साल की बात करते हैं तो आपको अपने 20 साल का भी हिसाब देना होगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें