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ब्रिक्स समिट में होगी मोदी सरकार की कूटनीति की अग्निपरीक्षा

Wed, 12 Oct 2016 12:01 PM IST
हिमांशु मिश्र /अमर उजाला, नई दिल्ली
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ब्रिक्स सम्मेलन का गोवा में होगा आयोजन - फोटो : Getty
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गोवा में 15 और 16 अक्टूबर को होने जा रहे 8वें ब्रिक्स समिट में मोदी सरकार को कूटनीति के कई मोर्चों पर अग्निपरीक्षा के दौर से गुजरना होगा। भारत की कोशिश इस मंच पर भी सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ब्रिक्स के सदस्य देशों को एकजुट करने की है। हालांकि समिट में भाग लेने से पहले ही चीन ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता हासिल करने और आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने की भारत के प्रयास को पलीता लगाने का साफ संदेश दे दिया है। 
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भारत के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण देश रूस ने यह संदेश भेज कर नई परेशानी खड़ी कर दी है कि वह पाकिस्तान से भी सैन्य सहयोग समझौते का इच्छुक है। अन्य सदस्य देशों में ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने फिलहाल सीमा पार आतंकवाद पर अपना रुख साफ नहीं किया है। हालांकि समिट के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन के साथ होने वाली वार्ता के दौरान इन मुद्दों को सकारात्मक दिशा देने की कोशिश की जाएगी।

 
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सर्जिकल अटैक पर वैश्विक रुख के कारण चुप रहा चीन

modi china xi - फोटो : pti
दरअसल भारत की रणनीति इस मंच के माध्यम से भी पाकिस्तान को आंतकवाद के सवाल पर कड़ा संदेश देने की थी। मगर चीन के नकारात्मक और रूस के ढुलमुल रुख के कारण इस मंच से पाकिस्तान को सीधी चेतावनी मिलने की संभावना कम है। हालांकि भारत अंतिम कोशिश के तौर पर सीमा पार की जगह आतंकवाद के सवाल पर पाकिस्तान को परोक्ष रूप से कड़ा संदेश देने की कोशिश करेगा। इस दौरान पीएम मोदी जहां 17वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में पुतिन के समक्ष सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर गंभीर बातचीत करेंगे, वहीं चीनी राष्ट्रपति के समक्ष एनएसजी की सदस्यता और मसूद अजहर पर प्रतिबंध का सवाल उठाएंगे। भारत को फिलहाल सीमा पार आतंकवाद के मामले में दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील से पूरा समर्थन मिलने की उम्मीद है।

उड़ी आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की ओर से किए गए सर्जिकल अटैक पर चीन आतंकवाद के खिलाफ बने वैश्विक रुख के कारण चुप रहा। तब चीन परोक्ष रूप से पाकिस्तान के साथ होने के बावजूद उसके पक्ष में बोल कर दुनिया की आलोचना का सामना नहीं करना चाहता था। हालांकि एनएसजी की सदस्यता और मसूद अजहर पर प्रतिबंध के सवाल पर चीन ने समिट शुरू होने से पहले ही भारत को अपने नकारात्मक रुख से अवगत करा दिया है।
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