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Kerala: तीसरी पारी में रोड़ा बन सकता है विजयन का रवैया; सहयोगी भी कार्यशैली से नाराज, गहराएगी सत्ता विरोधी लहर

Tue, 07 Apr 2026 06:56 AM IST
Pavan आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

Kerala Assembly Election 2026: केरल में विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ताधारी एलडीएफ के घटक दलों में थोड़ी नाराजगी मुख्यमंत्री विजयन के तीसरे कार्यकाल में रोड़ा बन सकती है। सीएम विजयन की छवि एक कुशल प्रशासक की रही है, पर बतौर सीएम उनकी दूसरी पारी में स्थिति बदली है।
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पिनाराई विजयन, केरल के मुख्यमंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का कड़क रवैया चुनाव में एलडीएफ के लिए चिंता का सबब बनता दिख रहा है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक वर्ग सीएम के इसी रवैये को अधिनायकवादी बता रहा है। सत्तारूढ़ एलडीएफ के लिए यह मुद्दा दोधारी तलवार साबित हो सकता है। सीएम विजयन के समर्थक जहां इसे मजबूत नेतृत्व का प्रतीक बताते हैं, वहीं विपक्ष व कुछ अंदरूनी स्वर इसे अधिनायकवादी और केंद्रीयकरण की प्रवृत्ति का प्रतीक मानते हैं। लिहाजा इस बार चुनाव काफी हद तक शासन प्रणाली के विजयन मॉडल पर जनमत संग्रह बन गया है।
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दूसरी पारी में बदली है सीएम विजयन की स्थिति
मुख्यमंत्री की छवि एक कुशल प्रशासक की रही है, पर बतौर सीएम उनकी दूसरी पारी में स्थिति बदली है। पत्रकारों के प्रति तीखा व्यवहार, विपक्ष के आरोपों पर सीधे जवाब की बजाय उपेक्षा व कई मौकों पर अनावश्यक सख्ती  जनता में सत्ता के अहंकार के तौर पर दर्ज हो रही है। कांग्रेस ने चुनावी रैलियों में विजयन पर सत्ता को केंद्रीयकृत रखने के आरोप लगाए। विपक्षी नेता मानते हैं कि फैसले लेने की प्रक्रिया में कैबिनेट की भूमिका सीमित हो गई है। विजयन की यह आलोचना विपक्ष तक ही सीमित नहीं है। गठबंधन की साझेदार भाकपा के भीतर से भी सुधार की मांग उठी है। भाकपा की जिला परिषदों की बैठकों में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि सीएम का अड़ियल रुख और जनता से कटना वाम कैडरों का उत्साह कम कर रहा है। एलडीएफ के बागी प्रत्याशियों ने भी सीएम के रवैये को तानाशाहीपूर्ण बताया है। 
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माकपा की भीतरी समीक्षाओं में भी नेतृत्व शैली की आलोचना 
लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद माकपा की अंदरूनी समीक्षाओं में भी नेतृत्व शैली की आलोचना सामने आई थी। कुछ नेताओं ने माना कि सरकार और पार्टी में संवाद बेहतर होना चाहिए और निर्णय प्रक्रिया में अधिक सहभागिता की जरूरत है। यह आलोचनाएं सार्वजनिक रूप से भले सीमित रहीं, पर यह बताने के लिए पर्याप्त थीं कि पार्टी का एक हिस्सा सीएम के रवैये से असहज है।
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अधिनायकवादी नेता की छवि
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता शासन में मजबूती तो पसंद करता है, पर व्यवहार में विनम्रता की उम्मीद भी रखता है। यदि एलडीएफ तीसरी बार सत्ता में वापसी करना चाहता है, तो नेतृत्व में थोड़ी नरमी लानी होगी। वरिष्ठ पत्रकार एमजी राधाकृण्णन कहते हैं कि सीएम की छवि एक अहंकारी या अधिनायकवादी नेता के तौर पर बनी है। हाल ही में एक प्रेस वार्ता में जब एक पत्रकार ने सवाल पूछा, तो विजयन ने गुस्से में तीखी प्रतिक्रिया दी।

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