केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को पुलिस को एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति दे दी। न्यायाधीश के नाबालिग बेटे के शामिल होने वाले एक सड़क हादसे में, चेरानल्लूर के पास 55 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
उच्च न्यायालय ने क्या आदेश दिया?
सूत्रों के अनुसार, पुलिस की ओर से न्यायाधीश के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति मांगे जाने के बाद, उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक स्तर पर यह आदेश जारी किया। पीड़ित जयाबालकृष्णन (55) के परिवार वालों ने चेरानल्लूर पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद रविवार को जमानत पर रिहा हुए न्यायाधीश के नाबालिग बेटे को फिर से पकड़ लिया गया।
किन धारा के तहत मामला दर्ज?
लड़के के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया और उसे किशोर न्याय बोर्ड (जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड) के सामने पेश किया गया, जिसने उसे जमानत पर रिहा कर दिया।
पुलिस ने क्या बताया?
यह हादसा रविवार तड़के 2 से 3 बजे के बीच हुआ, जब जयाबालकृष्णन अपना फूड स्टॉल बंद करके घर लौट रहे थे। पुलिस के मुताबिक, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम पर रजिस्टर्ड एक मर्सिडीज-बेंज कार को उनका नाबालिग बेटा चला रहा था। उसने तेज रफ्तार में पीछे से जयाबालकृष्णन के दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी, जिससे 55 वर्षीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई।
शुरुआत में, नाबालिग के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106 (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत मामला दर्ज किया गया था और उसे किशोर न्याय अधिनियम (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट) के प्रावधानों के तहत जमानत पर छोड़ दिया गया था।
पीड़ित की बेटी ने क्या कहा?
पीड़ित की बेटी ने सोमवार सुबह पत्रकारों से कहा कि वह अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई जारी रखेगी। उसने कहा कि वह न्यायाधीश या उनके नाबालिग बेटे को जयाबालकृष्णन की मौत की जिम्मेदारी से बचने नहीं देगी।
उसने यह भी कहा कि उसे पुलिस पर भरोसा नहीं है। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने नाबालिग लड़के के साथ नरमी बरती, क्योंकि वह एक न्यायाधीश का बेटा है। उसने आगे कहा कि नाबालिगों से जुड़ी ऐसी घटनाओं को सामान्य माना जाने लगा है। चूंकि वे नाबालिग हैं, इसलिए उन्हें गंभीर अपराध करने के बावजूद कानून की पकड़ से बच निकलने दिया जा रहा है।