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Kerala Politics: सबरीमाला विवाद पर कांग्रेस को बड़ा झटका, दो प्रभावशाली संगठनों ने एलडीएफ सरकार का किया समर्थन

Wed, 24 Sep 2025 04:13 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

केरल में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है क्योंकि नायर सर्विस सोसाइटी और एसएनडीपी योगम ने सबरीमाला मुद्दे पर एलडीएफ सरकार का समर्थन किया है। एनएसएस महासचिव जी. सुकुमारन नायर ने कहा कि सरकार ने परंपराओं की रक्षा का आश्वासन दिया है, जबकि एसएनडीपी ने भी इस रुख को सही ठहराया। ऐसे में माना जा रहा है कि यह आगामी चुनावों में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है।
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मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल की राजनीति में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। स्थानीय निकाय चुनाव और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले दो प्रभावशाली संगठनों नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) और श्री नारायण धर्म परिपालना (एसएनडीपी) योगम ने सबरीमाला मुद्दे पर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के रुख का समर्थन कर दिया है। यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला है।
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एनएसएस पहले वाम सरकार के उस फैसले का विरोध कर चुका है जिसमें 2018 के सुप्रीम कोर्ट आदेश को लागू करते हुए सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। यह संगठन परंपरागत रूप से कांग्रेस के साथ खड़ा माना जाता रहा है। लेकिन अब एनएसएस महासचिव सुकुमारन नायर ने कहा कि राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि मंदिर की पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों की रक्षा होगी, जिस पर उन्हें भरोसा है। यानी इससे साफ हो जाता है कि इस संगठन ने कांग्रेस को अकेला छोड़ दिया।

कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना
सुकुमारन नायर ने भाजपा नीत केंद्र सरकार की निष्क्रियता की आलोचना करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस हिंदू वोटों में रुचि नहीं रखती। एनएसएस के इस बयान ने कांग्रेस के राजनीतिक समीकरणों पर गंभीर असर डाला है।
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एसएनडीपी ने भी एनएसएस के कदम का किया समर्थन
एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लप्पल्ली नटेसन ने एनएसएस के रुख का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एनएसएस हमेशा सरकार के खिलाफ नहीं रहा है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एनएसएस ने पहले भी सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले का स्वागत किया था। नटेसन के मुताबिक, एनएसएस की मौजूदा स्थिति पूरी तरह मुद्दा-आधारित है और इससे सत्तारूढ़ एलडीएफ को चुनावों में फायदा होगा।

कांग्रेस की सावधानी भरी प्रतिक्रिया
एनएसएस के इस बदलते रुख पर कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि कांग्रेस और एनएसएस  के संबंध अब भी अच्छे हैं और पार्टी ने संगठन से भरोसा नहीं खोया है। उन्होंने कहा कि उचित समय पर कांग्रेस एनएसएस से संपर्क करेगी। चेन्निथला ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को वैश्विक अयप्पा संगमम आयोजित करने से पहले श्रद्धालुओं से माफी मांगनी चाहिए थी।
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चुनावी समीकरणों पर असर तय
एनएसएस और एसएनडीपी जैसे प्रभावशाली संगठनों का समर्थन एलडीएफ को स्थानीय निकाय और 2026 विधानसभा चुनावों में मजबूती देगा। वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनौती है कि वह अपने पुराने सहयोगी संगठनों का विश्वास फिर से कैसे जीत पाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सबरीमाला विवाद पर यह रुख कांग्रेस की चुनावी रणनीति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।


 
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