सबरीमाला सोना गुमशुदगी मामले को लेकर केरल विधानसभा में सत्तारूढ़ एलडीएफ और विपक्षी यूडीएफ के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। यूडीएफ ने देवस्वोम मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सदन की कार्यवाही बाधित की। एलडीएफ ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं।
सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोना गुमशुदगी मामले ने केरल की राजनीति में एक बार फिर उबाल ला दिया। इसी मुद्दे पर गुरुवार को केरल विधानसभा के भीतर और बाहर सत्तारूढ़ एलडीएफ और विपक्षी यूडीएफ आमने-सामने आ गए। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई और मामला सियासी टकराव का केंद्र बन गया।
विज्ञापन
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने सबरीमाला सोना गुम होने के मामले में देवस्वोम मंत्री वी.एन. वासवन के इस्तीफे की मांग को लेकर विधानसभा की कार्यवाही बाधित की। यूडीएफ का आरोप है कि इस पूरे मामले के पीछे सीपीआई(एम) की भूमिका है और सोने की कथित लूट हुई है। विपक्ष का कहना है कि जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक इस मुद्दे पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है।
एलडीएफ का पलटवार
एलडीएफ ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। सदन में एलडीएफ का दावा रहा कि सबरीमाला से सोना गायब होने के मामले के पीछे कांग्रेस की भूमिका है। एलडीएफ के मंत्रियों एम.बी. राजेश और वी. शिवनकुट्टी ने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी की कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात हुई थी। शिवनकुट्टी ने यह भी कहा कि मामले की गहन जांच होनी चाहिए और दोषियों से सख्ती से पूछताछ की जानी चाहिए।
सदन के बाहर टकराव
कार्यवाही स्थगित होने के बाद एलडीएफ के विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि यूडीएफ चर्चा से भाग रहा है और इसलिए सदन की कार्यवाही बाधित की जा रही है। एलडीएफ विधायकों का कहना था कि यदि विपक्ष के पास ठोस तथ्य हैं तो वह चर्चा से क्यों बच रहा है। उनका दावा रहा कि विशेष जांच दल की जांच से सच्चाई सामने आएगी और किसी को भी बचाया नहीं जाएगा।
यूडीएफ की सफाई
वहीं यूडीएफ नेताओं ने दोहराया कि देवस्वोम मंत्री की भूमिका संदिग्ध है और इसी कारण उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि सत्तापक्ष बेबुनियाद आरोप लगाकर असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब पहले इस मामले पर चर्चा की मांग की गई थी, तब इसे न्यायालय में विचाराधीन बताकर अनुमति नहीं दी गई थी। यूडीएफ का कहना है कि सत्तापक्ष खुद भ्रम की स्थिति में है और जनता को गुमराह किया जा रहा है।