कोच्चि (शहर) के पुलिस आयुक्त सी.एच. नागराजू ने कहा, "हत्या के पीछे अंग माफिया होने के आरोप निराधार हैं। अस्वच्छ परिस्थितियों में अंग प्रत्यारोपण भी संभव नहीं है।"
केरल में हुए मानव बलि के सनसनीखेज मामले में रोज नई जानकारियां निकलकर सामने आ रही हैं। इस बीच, मंगलवार को कोच्चि पुलिस ने कहा कि दो महिलाओं की मानव बलि के पीछे कोई अंग माफिया नहीं हैं।
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'हत्या के पीछे अंग माफिया होने के आरोप निराधार'
कोच्चि (शहर) के पुलिस आयुक्त सी.एच. नागराजू ने कहा, "हत्या के पीछे अंग माफिया होने के आरोप निराधार हैं। अस्वच्छ परिस्थितियों में अंग प्रत्यारोपण भी संभव नहीं है। यदि आप सामान्य जानकारी भी रखते हैं तो यह (मानव अंग) इसके काम नहीं आएंगे। इस बात का शक है कि मुख्य आरोपी मोहम्मद शफी ने सह-आरोपी को इस संबंध में गुमराह किया है।" पुलिस आयुक्त ने कहा कि आरोपी के खिलाफ अहम साइंटिफिक और टेक्नीकल सबूत हैं।
कसाई की स्टाइल में शवों को किया क्षत-विक्षत : पुलिस आयुक्त, कोच्चि
नागराजू ने आगे यह भी कहा कि इस बात के कोई संकेत नहीं मिले हैं कि मानव बलि के और पीड़ित हैं। गुमशुदगी के मामलों की जांच की जा रही है। गुमशुदगी और मानव बलि के मामलों के बीच संबंध को लेकर कोई सबूत नहीं मिले हैं। आरोपियों के कई फोन जब्त किए गए हैं। मुख्य आरोपी ने मोहम्मद शफी ने शवों को कसाई की स्टाइल में शवों को क्षत-विक्षत किया। सबूतों को इकट्ठा किया जा रहा है।
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मृतकों के परिजनों का लिया गया डीएनए सैंपल
मामले को लेकर कोच्चि के डीसीपी एस. शशिधरन ने कहा कि जांच प्रक्रिया में है और आरोपी के खिलाफ कई साइंटिफिक सबूत हैं। डीसीपी ने कहा, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मुख्य आरोपी मोहम्मद शफी ने मानव बलि अनुष्ठान में और लोगों की भी हत्या की। मृतक महिला पद्मा के मोबाइल फोन की जांच की जा रही है। निर्णायक सूबत के लिए उसके परिजनों के डीएनए सैंपल लिए गए हैं।
डीएनए सैंपल के लिए एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज ले जाए गए आरोपी
इससे पहले सोमवार को केरल के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एक परीक्षण किया और तीनों आरोपियों के डीएनए सैंपल एकत्र किया। अधिकारियों ने कहा, एसआईटी मोहम्मद शफी, भगवल सिंह और लैला के रूप में पहचाने गए आरोपियों के सैंपल लेने के लिए उन्हें एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज ले गई थी। पुलिस ने यहां आरोपियों का परीक्षण भी किया।