केरल हाईकोर्ट ने कथित हिंसक प्रदर्शन में शामिल भगवान अयप्पा के भक्तों पर जारी राज्य सरकार की कार्रवाई पर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। हाईकोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी निर्दोष की गिरफ्तारी होती है तो इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। सबरीमाला के भगवान अयप्पा मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र की महिलाओं को प्रवेश से रोकने के लिए विरोध प्रदर्शन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अब तक 1400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
440 मामले दर्ज करने के अलावा 200 से अधिक लोगों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है। इसी संबंध में दाखिल एक याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी गिरफ्तारी इस आधार पर होनी चाहिए कि वह व्यक्ति हिंसक प्रदर्शन में शामिल था या नहीं। वहीं रजस्वला महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दाखिल करने वाले केरल के प्रभावशाली नायर समुदाय ने भी इस कार्रवाई को अनैतिक और अलोकतांत्रिक बताया है।
वहीं आगामी 17 नवंबर से शुरू हो रहे त्यौहार मंडलम मकरविलाकु को देखते हुए भीड़ नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने 31 अक्तूबर को दक्षिणी राज्यों के देवस्वम मंत्रियों की एक बैठक बुलाई है। अधिकारियों ने कहा कि सरकार तिरुपति की तरह डिजिटल कतार प्रणाली लागू करने पर भी विचार कर रही है और इस पर भी चर्चा होगी।