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Kerala: हेमा कमेटी रिपोर्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित होगी विशेष पीठ; केरल हाईकोर्ट का निर्देश

Thu, 05 Sep 2024 02:16 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

फिल्म निर्माता साजिमोन पारायिल ने सूचना आयोग के 5 जुलाई के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बाद में 13 अगस्त को एकल न्यायाधीश ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
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मलयालम सिनेमा कांड - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मचा हुआ है। कई अभिनेत्रियों ने अभिनेताओं और निर्देशकों पर शोषण के आरोप लगाए हैं। इन सबके बीच, गुरुवार को केरल हाईकोर्ट ने जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की विशेष पीठ के गठन की बात कही है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए मुहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति एस मनु की पीठ हेमा कमेटी की रिपोर्ट जारी करने की अनुमति देने वाले एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।  

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सुनवाई के दौरान याचिका से जुड़े वकील ने इस बारे में बताते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने कहा है कि गठित की जाने वाली विशेष पीठ में महिला न्यायाधीश भी शामिल होंगी। 

बता दें कि फिल्म निर्माता साजिमोन पारायिल ने सूचना आयोग के 5 जुलाई के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बाद में 13 अगस्त को एकल न्यायाधीश ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। साथ ही हेमा कमेटी की रिपोर्ट को जारी करने वाले राज्य सूचना आयोग के आदेश को अनुमति दी थी। इसके बाद, परायिल ने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की, जिसने गुरुवार को पैनल की रिपोर्ट से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष पीठ गठित करने का फैसला किया।
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हेमा समिति क्या है?
मलयालम सिनेमा में यौन उत्पीड़न का मामला भले ही अभी चर्चा में आया हो लेकिन इसकी कहानी कई वर्ष पुरानी है। इस पूरे मामले की जड़ में फरवरी 2017 में एक लोकप्रिय मलयालम अभिनेत्री के साथ घटी घटना है। उस वक्त अभिनेत्री ने कोच्चि में अपने साथ हुए अपहरण और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद केरल पुलिस ने अभिनेता दिलीप पर यौन उत्पीड़न की साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया।

 इस घटना से इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया। मई 2017 में मलयालम सिनेमा के महिला कलाकारों और तकनीशियनों का एक समूह पीड़ितों का समर्थन में उतर आया। इसके साथ ही मॉलीवुड में महिलाओं के साथ होने वाली लैंगिक असमानता, दुर्व्यवहार और अन्याय को उजागर करने के लिए वुमन इन सिनेमा कलेक्टिव (डब्ल्यूसीसी) नाम की एक संस्था बनाई गई। मई महीने में ही डब्ल्यूसीसी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से मुलाकात कर साजिश की जांच और मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मलयालम सिनेमा में महिलाओं के सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री को एक लिखित अपील भी सौंपी।

इसी संस्था की अपील के आधार पर केरल सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के. हेमा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। इस समिति में पूर्व अभिनेता शारदा और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी केबी वलसाला कुमारी भी शामिल की गईं।

अब हेमा समिति की रिपोर्ट में क्या है?
फरवरी 2017 की घटना के बाद बनी हेमा समिति ने इसी 18 अगस्त को मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के सामने आने वाली समस्याओं पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की। हालांकि, यह रिपोर्ट सरकार को पांच साल पहले ही सौंपी जा चुकी थी। 18 अगस्त को सार्वजनिक हुई 235 पन्ने की रिपोर्ट में कई तरह के गंभीर मामले सामने आए। सिनेमा उद्योग में यौन शोषण, अवैध प्रतिबंध, भेदभाव, नशीली दवाओं और शराब के दुरुपयोग, वेतन असमानता जैसे खतरनाक और गंभीर मामले उजागर हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि मलयालम सिनेमा कुछ पुरुष निर्माताओं, निर्देशकों और अभिनेताओं के चंगुल में है।

रिपोर्ट आने के बाद क्या हुआ?
हेमा कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद से कई महिला कलाकार यौन उत्पीड़न के अपने दर्दनाक अनुभवों को साझा करने के लिए आगे आई हैं। कई लोगों ने मलयालम सिनेमा के कुछ जाने-माने चेहरों पर आरोप लगाए हैं, जिनमें निर्देशक रंजीत और अभिनेता सिद्दीकी और मुकेश शामिल हैं।
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