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Kerala: हाईकोर्ट से राज्यपाल को झटका, केरल यूनिवर्सिटी की सीनेट से गवर्नर के नामांकन रद्द

Tue, 21 May 2024 09:43 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

हाईकोर्ट के जस्टिस मोहम्मद नियास सीपी ने अपने फैसले में कहा कि 'चांसलर के पास किसी को भी नामित करने की बेलगाम शक्ति नहीं है। अगर नामांकन तय आवश्यकता के विपरीत है तो संवैधानिक अदालतों को इसमें हस्तक्षेप करना होगा।'
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केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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केरल हाईकोर्ट ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को बड़ा झटका देते हुए, उनके द्वारा केरल विश्वविद्यालय की सीनेट में राज्यपाल नामित लोगों के नामांकन को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने राज्यपाल को छह हफ्ते के भीतर नए नामितों का नाम सौंपने को कहा है। हाईकोर्ट ने हालांकि अपने फैसले में राज्य सरकार द्वारा नामित नामांकनों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। हाईकोर्ट के जस्टिस मोहम्मद नियास सीपी ने अपने फैसले में कहा कि 'चांसलर के पास किसी को भी नामित करने की बेलगाम शक्ति नहीं है। अगर नामांकन तय आवश्यकता के विपरीत है तो संवैधानिक अदालतों को इसमें हस्तक्षेप करना होगा।'
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कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि ताकत का मनमाना इस्तेमाल संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मिले समानता के नियम का उल्लंघन है। साथ ही यह अनुच्छेद 16 के तहत भेदभाव के नियम का भी उल्लंघन है। केरल विश्वविद्यालय के चार छात्रों ने राज्यपाल द्वारा नामांकन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। ये नामांकन विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट, खेल, मानविकी और विज्ञान वर्ग में किए गए थे। याचिका में आरोप लगाया गया कि इन नामांकन में सामान्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और अयोग्य लोगों को नामित किया गया। छात्रों ने मांग की कि राज्यपाल को निर्देश दिया जाए कि उन्हें सीनेट में नामित करें। 

राज्य सरकार को दी राहत
गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा नामित नामों के खिलाफ भी याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया कि जिन लोगों को नामित किया गया, उनके पास उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं है और उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। राज्य सरकार के नामितों के खिलाफ दर्ज मुकदमों पर कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक जीवन में किए गए कामों की वजह से उनके खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं, साथ ही लंबित मामलों के चलते किसी को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता। सत्ताधारी सीपीएम ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया और इस पर खुशी जताई। 
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