पोर्श कार से दो इंजीनियरों को कुचलने के मामले में आरोपी नाबालिग चालक को वयस्क आरोपी के रूप में माना जाना चाहिए या नहीं, यह तय करने की प्रक्रिया में कम से कम दो महीने लग सकते हैं। नाबालिग किशोर के वकील प्रशांत पाटिल ने कहा, मनोचिकित्सकों और परामर्शदाताओं के अलावा अन्य लोगों की रिपोर्ट मांगी जाती है। इसके बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड अपना फैसला सुनाता है। पुणे में पोर्श कार से हुए हादसे की जांच कर रहे अधिकारियों ने एक बार को सील कर दिया है। दरअसल इस बार में बैठकर ही आरोपी नाबालिग ने अपने दोस्तों के साथ शराब पी थी। नाबालिगों को शराब परोसने के आरोप में प्रशासन ने बार को सील कर दिया है। महाराष्ट्र में शराब पीने की उम्र 25 साल है, ऐसे में आरोपियों को नाबालिग होने के बावजूद शराब परोसने के लिए बार के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पुलिस ने बार के खिलाफ मामला दर्ज किया है और बार की सीसीटीवी फुटेज जांचने पर आरोपी नाबालिग अपने दोस्तों के साथ शराब पीते हुए पाया गया।
विशिष्ट पैरामीटर निर्धारित किए जाएंगे
अदालत में मुकदमे के भविष्य को लेकर
वकील पाटिल ने कहा कि रिमांड के दौरान किशोर को सुधार घर में रखा जाएगा, इस अवधि के लिए विशिष्ट पैरामीटर निर्धारित किए जाएंगे। बोर्ड ने उसके मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने और उसे मुख्यधारा में फिर से शामिल करने में मदद करने के लिए एक मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक या परामर्शदाता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
आरोपी को वयस्क मानने पर विचार, फिलहाल बाल सुधार गृह में कैद
पुलिस के जमानत खारिज होने के दावे पर पाटिल ने कहा, रविवार को दी गई जमानत खारिज नहीं की गई है। जेजे बोर्ड के आदेश में सिर्फ किशोर को 5 जून तक सुधार घर भेजा गया है। यह पहले के आदेश का संशोधन है....जमानत रद्द करने का मतलब है पहले के आदेश को रद्द करना और व्यक्ति को हिरासत में लेना। यहां, यह कोई हिरासत नहीं है, यह एक सुधार गृह है। आरोपी को वयस्क के रूप में माने जाने के आवेदन पर कोई आदेश अभी तक नहीं आया है।
नाबालिग चालक के दादा, दोस्त और एक ड्राइवर से पूछताछ
पुणे पुलिस ने नाबालिग किशोर के दादा, उसके एक दोस्त और एक कार चालक से बृहस्पतिवार को पूछताछ की गई। पुणे कमिश्नरी में नाबालिग के दादा को आरोपी किशोर व उसके पिता विशाल अग्रवाल के सामने बिठाकर पूछताछ की गई। उनसे कुछ तथ्यों के बारे में सवाल पूछे गए।
पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू
पुणे के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय ने पोर्श कार का अस्थायी पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरटीओ अधिकारी संजीव भोर ने कहा, इस इलेक्ट्रिक लक्जरी स्पोर्ट्स सेडान कार पोर्श टायकन को अस्थायी पंजीकरण पर महाराष्ट्र भेजने से पहले बंगलूरू के एक व्यक्ति ने मार्च में आयात किया था।
जनाक्रोश के बाद दर्ज हुआ मामला
गौरतलब है कि शराब पीने के कुछ घंटे बाद नाबालिग ने अपनी लग्जरी कार से एक बाइक को टक्कर मार दी। जिससे बाइक सवार एक युवक और युवती की मौत हो गई। आरोपी नाबालिग पुणे के एक चर्चित बिल्डर का बेटा है। इसमें हैरानी की बात ये है कि नशे में लापरवाही से गाड़ी चलाने के बावजूद आरोपी नाबालिग को 15 घंटे में ही जमानत भी मिल गई और वो भी सिर्फ दुर्घटना पर 300 शब्द का निबंध लिखने के बाद! इसी वजह से लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी है। लोगों की नाराजगी के बाद पुलिस ने नाबालिग के पिता के साथ ही बार के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
नाबालिग को दी गई जमानत को भी चुनौती
दोनों के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस कानून की धारा 75 और 77 के तहत मामला दर्ज किया गया है। दोनों पर नाबालिग को शराब और नशे की सप्लाई करने और लापरवाही बरतने के मामले में केस दर्ज किया गया है। मंगलवार को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी घटना को लेकर पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद डिप्टी सीएम ने कहा कि पुलिस इस मामले में और शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामलों को लेकर जरूरी कदम उठा रही है। अधिकारियों की तरफ से नाबालिग को दी गई जमानत को भी चुनौती दी गई है।
हादसे में दो इंजीनियर्स की हुई थी मौत
सोमवार को सुबह 2.15 बजे करीब 200 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से जा रही पोर्श कार ने पुणे में एक बाइक को टक्कर मार दी थी। घटना के वक्त नाबालिग गाड़ी चला रहा था और वह नशे में था। दुर्घटना में अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई थी। दोनों इंजीनियर थे और बाइक से अपने-अपने घर लौट रहे थे। मृतकों के परिजनों ने आरोपी की जमानत को रद्द करने की मांग की है।