केरल हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री और माकपा विधायक के.के.शैलजा व 11 अन्य के खिलाफ लोकायुक्त की ओर से शुरू की गई कार्रवाई को बरकरार रखा है। शैलजा व अन्य पर कोविड-19 महामारी के दौरान साल 2020 में पीपीई किट समेत उपकरणों की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप है।
हाईकोर्ट ने शैलजा और 11 अन्य को आरोपों पर लोकायुक्त के समक्ष अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस एस. मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी चाली ने याचिका में नामित सभी लोगों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिला करने का आदेश दिया।
कांग्रेस नेता वीणा नायर ने भ्रष्टाचार के आरोपों की शिकायत के साथ लोकायुक्त से संपर्क किया था। नायर राज्य की राजधानी शहर में विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार थीं।
शैलजा और 11 अन्य पर प्रमुख आरोप यह है कि जिस पीपीई किट की कीमत करीब पांच सौ रुपये होनी चाहिए थी, वह पंद्रह सौ रुपये में खरीदी गई। लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच करने के बाद शैलजा और 11 अन्य को 8 दिसंबर को उनके सामने पेश होने के लिए नोटिस भेजा है।
लोकायुक्त के इस नोटिस को शैलजा और राज्य सरकार के अधिकारियों सहित अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, अदालत ने उनकी याचिका पर गौर करने के बाद फैसला सुनाया कि लोकायुक्त को मामले को आगे बढ़ाने का अधिकार है और प्रारंभिक जांच के समय अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी।
अदालत ने यह भी कहा कि महामारी के समय में किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि कोई कुछ भी कर सकता है और जांच को लेकर डर क्यों है। हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को सच्चाई जाननी चाहिए, क्योंकि शिकायत यह है कि पीपीई किट अधिक कीमत पर खरीदे गए।