शैक्षिक संस्थानों में धरना-प्रदर्शन के खिलाफ केरल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र विशेषकर शैक्षिक संस्थानों में धरना-प्रदर्शन की कोई जगह नहीं है। छात्रों को अगर किसी मामले पर अपनी बात रखनी है तो उसके लिए कई तरीके हैं और अगर फिर भी समाधान नहीं होता तो वे कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगर कोई छात्र धरना या प्रदर्शन करता है, तो कॉलेज प्रशासन उसे बर्खास्त कर सकता है। जज नवनीति प्रसाद सिंह ने कहा कि जो लोग परिसर में ऐसे कदम उठाते हैं वे मानकर चलते हैं कि उनकी मांग कानूनी और जायज नहीं है।
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मामला मल्लापुरम का है जहां एमईएस कॉलेज के प्रिसिंपल की ओर से न्यायालय की अवमानना का केस दर्ज किया गया। केस स्टूडेंट्स यूनियन के सेक्रेटरी देबाशीश कुमार बेहरा के खिलाफ दायर हुआ है। कोर्ट ने कहा कि धरना, भूख हड़ताल और सत्याग्रह जैसे गतिविधियों के लिए शैक्षिक संस्थानों में कोई जगह नहीं है। शैक्षिक संस्थान राजनीति के लिए नहीं बल्कि शिक्षा के लिए होते हैं।