केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जिन लोगों का पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से कोई संबंध नहीं है और राज्य सरकार के राजस्व वसूली अधिकारियों द्वारा गलती से कुर्क की गई थी, उनकी संपत्तियों पर कुर्की हटाकर उन्हें रिहा किया जाए।
दरअसल, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि पीएफआई से वसूली के संबंध में पहचान की गई संपत्तियों के नाम, पते और सर्वेक्षण संख्या में कुछ गलतियां हुई हैं। इसके परिणामस्वरूप उन व्यक्तियों की कुछ संपत्तियों को गलत तरीके से कुर्क कर लिया गया जो संगठन से जुड़े नहीं थे। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत एक हलफनामे में यह जानकारी दी गई थी।
हाईकोर्ट ने पिछले साल 2 सितंबर को पीएफआई को आदेश दिया था कि वह 30 सितंबर को संगठन द्वारा आयोजित अवैध हड़ताल के दौरान भड़की हिंसा में केरल राज्य परिवहन निगम (केएसआरटीसी) को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दो सप्ताह के भीतर 5.20 करोड़ रुपये जमा कराए।
अपने हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा, आदेश (हाईकोर्ट के) के अनुपालन में आईजी द्वारा पहचान की गई संपत्तियों का विवरण, पंजीकरण कुर्की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भूमि राजस्व आयुक्त को भेज दिया गया था। चूंकि, ये सभी प्रक्रियाएं सीमित समय अवधि में शुरू की गई थीं, इसलिए पहचाने गए लोगों के नाम, पते, सर्वेक्षण संख्या आदि में कुछ समानता के कारण कुछ गलतियां हुईं। इसलिए इसके चलते उन व्यक्तियों की कुछ संपत्तियों को गलत तरीके से कुर्क कर लिया गया जो संगठन से जुड़े नहीं थे।
हलफनामे में कहा गया था, जब सरकार के संज्ञान में यह आया कि कुर्की में कुछ गलतियां हुई हैं, तो भू-राजस्व आयुक्त और राज्य पुलिस प्रमुख को इन संपत्तियों के संबंध में आगे की कार्यवाही को रोकने का निर्देश दिया गया था, जिन्हें गलती से पहचाना गया था।
18 जनवरी 2023 के आदेश में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में पीएफआई से संबंधित 209 व्यक्तियों की संपत्तियों के संबंध में मांगी गई संपत्ति को कुर्क करने के लिए जिला कलेक्टरों को भेज दिया गया था। भू-राजस्व आयुक्त ने सूचित किया है कि उनमें से 177 संपत्तियों के संबंध में मूल्यांकन रिपोर्ट संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार की गई थी। कुर्की की कार्यवाही के संबंध में उठाए गए विवादों को देखते हुए शेष संपत्तियों का मूल्यांकन पूरा नहीं किया जा सका।
हाईकोर्ट ने इससे पहले सरकार को कार्यवाही पूरी करने के बाद 23 जनवरी या उससे पहले रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इससे पहले भी, राज्य सरकार ने प्रतिबंधित पीएफआई और उसके सचिव से नुकसान की वसूली के अपने निर्देश का पालन न करने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी थी।