केरल में मुनंबम भूमि विवाद के चलते राज्य भर की सियासी गर्माहट तेज है। इसी बीच इस मामले में केरल हाईकोर्ट ने राज्य की विजयन सरकार को करारा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने सोमवार को मुनंबम भूमि विवाद की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए न्यायिक आयोग के गठन के आदेश को रद्द कर दिया। मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने यह आदेश बिना उचित विचार-विमर्श के और जल्दबाजी में जारी किया था।
सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी
अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने जांच आयोग की नियुक्ति के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार नहीं किया गया, जैसे वक्फ बोर्ड की टिप्पणियां, वक्फ अधिनियम के प्रावधान, और जांच आयोग की पिछली रिपोर्टें। अदालत के अनुसार, राज्य सरकार ने यह भी ध्यान नहीं दिया कि यह मामला वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष पहले ही विचाराधीन था। इसके अलावा, अदालत ने यह भी बताया कि जांच आयोग के आदेश में कोई स्पष्टता नहीं थी कि यह मामला सार्वजनिक महत्व का कैसे बन गया।
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बता दें कि पिछले साल नवंबर में, राज्य सरकार ने मुनंबम क्षेत्र में भूमि स्वामित्व की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग गठित किया था। हालांकि, केरल वक्फ बोर्ड ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। राज्य सरकार का कहना था कि आयोग का काम केवल तथ्य जुटाना है, ताकि सरकार इस मामले पर आगे की कार्रवाई तय कर सके। लेकिन उच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया कि जब मामला वक्फ न्यायाधिकरण में पहले से चल रहा था, तब इस तरह का आयोग गठित करना कानूनी नहीं था।
क्या है मुनंबम भूमि विवाद, समझिए
गौरतलब है कि केरल के मुनंबम भूमि विवाद में एक क्षेत्रीय संपत्ति के स्वामित्व को लेकर विवाद है। यह मामला मुख्य रूप से एर्नाकुलम जिले के चेराई और मुनंबम गांवों से जुड़ा हुआ है, जहां स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि केरल वक्फ बोर्ड ने अवैध रूप से उनकी भूमि और संपत्ति पर कब्जा कर लिया है, जबकि उनके पास पंजीकृत दस्तावेज और भूमि कर भुगतान की रसीदें हैं। हालांकि इस विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने पहले एक न्यायिक आयोग का गठन किया था, जिसका उद्देश्य भूमि स्वामित्व का पता लगाना था। हालांकि केरल हाईकोर्ट ने इस आयोग के गठन को रद्द कर दिया है।
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विपक्षी नेता वीडी सतीशन ने लगाए आरोप
इस बीच, विपक्षी नेता वीडी सतीशन ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस मामले में देरी कर रही थी, जिससे दो समुदायों के बीच तनाव पैदा हो। भाजपा ने भी इस मुद्दे का स्थायी समाधान वक्फ विधेयक में संशोधन करने में ही बताया और विपक्षी पार्टियों से इसे संसद में समर्थन देने का आग्रह किया।
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