केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य सरकार से मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों पर हेमा समिति की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करने को कहा है। मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए. मुहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति एस. मनु की खंडपीठ ने तिरुवनंतपुरम के रहने वाले नवास की तरफ से दायर जनहित याचिका पर विचार करते हुए कहा कि रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगे हैं।
हाईकोर्ट ने स्वीकार की रिट याचिका
इस मामले में उच्च न्यायालय ने रिट याचिका स्वीकार कर ली और केरल सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने हेमा समिति की तरफ से प्रस्तुत रिपोर्ट पर सरकार के अगले कदम के बारे में भी पूछा है। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि जब तक कोई शिकायत दर्ज नहीं करता, तब तक मामला दर्ज करना संभव नहीं है।
राज्य सरकार ने मामले में रखा अपना पक्ष
राज्य सरकार ने कहा कि उसके पास बिना सेंसर की गई मूल रिपोर्ट में उल्लिखित सभी नाम हैं, जो एक गोपनीय दस्तावेज था। सरकार ने कहा कि समिति को फिल्म उद्योग में महिलाओं की स्थिति का अध्ययन करने और रिपोर्ट करने का काम सौंपा गया था, लेकिन सरकार के पास मामले दर्ज करने की सीमाएं हैं, क्योंकि समिति ने गोपनीयता सुनिश्चित करने के बाद बयान दर्ज किए थे। सरकार ने कहा कि उस गोपनीयता बयान के खिलाफ मामला दर्ज करना संभव नहीं है, उन्होंने कहा कि अगर कोई आगे आता है और शिकायत दर्ज करता है तो मामला दर्ज किया जाएगा। वहीं हाईकोर्ट ने गुरुवार को मामले में राज्य महिला आयोग को खुद ही पक्षकार बनाया।
वहीं याचिका में मूल रिपोर्ट को प्रकाशित करने की मांग की और हाई कोर्ट से राज्य सरकार को रिपोर्ट में उल्लिखित कथित यौन अपराधों के संबंध में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
2017 में किया गया था हेमा समिति का गठन
बता दें कि न्यायमूर्ति के. हेमा समिति का गठन 2017 में अभिनेता दिलीप से जुड़े अभिनेत्री के उत्पीड़न के मामले के बाद किया गया था, जिसका उद्देश्य मलयालम सिनेमा में यौन उत्पीड़न और लैंगिक असमानता के मुद्दों का अध्ययन करना था। हालांकि रिपोर्ट 2019 में दायर की गई थी, लेकिन सरकार ने विवरण जारी नहीं किया क्योंकि इसमें संवेदनशील जानकारी होने का संदेह था।
सोमवार को जारी हुई हेमा समिति की रिपोर्ट
इससे पहले, 24 जुलाई को जारी होने वाली सेंसर की गई रिपोर्ट के प्रकाशन पर केरल उच्च न्यायालय ने एक मलयालम फिल्म निर्माता की याचिका पर रोक लगा दी थी। इसके बाद, हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को याचिका खारिज कर दी और सरकार को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्देश दिया। वहीं एक अभिनेत्री की याचिका के मद्देनजर प्रकाशन में फिर से देरी हुई, जिस पर हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को सुनवाई की थी। आखिरी में सोमवार को ही हेमा समिति की रिपोर्ट जारी हुई, जिसके बाद से केरल के राजनीतिक गलियारे में भूचाल आ गया है।