फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिजाब: केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने फैसले का स्वागत किया, कहा- इस्लाम आस्था के नियम खुद परिभाषित करता है

Tue, 15 Mar 2022 06:33 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा है कि इस्लाम स्वयं परिभाषित करता है कि आस्था के लिए किन नियमों का होना आवश्यक है। इसलिए इस पर फैसला देने में न्यायपालिका का काम आसान हो गया।  विवाद की शुरुआत के समय खान ने कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम में आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है।
विज्ञापन
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध और इसके विरोध के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने स्वागत किया है। हाईकोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने साफ किया कि इस्लाम में हिजाब पहनना अनिवार्य धार्मिक अभ्यास नहीं है। स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएं यूनिफॉर्म पहनने से मना नहीं कर सकते। 

विज्ञापन


राज्यपाल खान ने इस फैसले को लेकर कहा कि मैं यह मानता हूं कि युवा मुस्लिम महिलाओं में देश के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और योगदान देने की क्षमता है, इसके साथ ही उनमें अपने परिवारों की देखभाल करने की भी क्षमता है। 



'उम्मीद करता हूं कि महिलाओं को दबाने के प्रयास असफल हों'
आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि मैं प्रार्थना करता हूं कि युवा महिलाओं और खास कर मुस्लिम महिलाओं को घर की चार दीवारों के अंदर धकेलने के लिए किए जा रहे ये प्रयास असफल हों। उन्होंने आगे कहा कि मैं युवा मुस्लिम महिलाओं को शुभकामनाएं देता हूं और उम्मीद करता हूं कि वह अच्छे काम करना जारी रखेंगी।
विज्ञापन


हिजाब विवाद की शुरुआत के समय खान ने कहा था कि इसे पहनना इस्लाम में आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है। आरिफ मोहम्मद खान ने भले की इस फैसले की तारीफ की हो लेकिन, मुस्लिम लीग और केरल मुस्लिम जमात के नेताओं ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। मुस्लिम लीग के राज्य महासचिव पीएमए सलाम ने कहा कि इस आदेश ने उन लोगों को दुख पहुंचाया है जो कानून में भरोसा करते हैं।

केरल मुस्लिम जमात के महासचिव सैयद इब्राहीम खलील अर बुखारी ने भी कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले की फिर से परीक्षण किए जाने की जरूरत है या इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि हिजाब पहनना इस्लाम में आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें