एनआईए की विशेष अदालत ने केरल सोना तस्करी मामले की मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। अदालत ने एनआईए द्वारा पेश किए गए सबूतों पर गौर करते हुए स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका खारिज कर दी।
गौरतलब है कि, पिछले साल नवंबर से राजनयिक चैनल के माध्यम से 100 करोड़ रुपये से अधिक की सोने की तस्करी में महिला की कथित भूमिका को लेकर जांच एजेंसी ने ये सबूत जुटाए थे।
एनआईए ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामले में गहन जांच की जरूरत है। एनआईए ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह सबूत हैं कि आरोपी ने जानबूझकर ऐसा कृत्य किया जो सीधे तौर पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धारा 15 का उल्लंघन है।
स्वप्ना सुरेश ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उसे बिना किसी आधार के सिर्फ कल्पना के सहारे इस अपराध में फंसाया गया है और और यह मामला राज्य तथा केंद्र सरकारों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का है, जिसे मीडिया ने तूल दिया।
इससे पहले, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने केरल सोना तस्करी मामले में छह और लोगों को गिरफ्तार किया है और छह स्थानों पर तलाशी ली। एजेंसी ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) के वाणिज्य दूतावास में राजनयिक माध्यमों से सोने की तस्करी के मामले में अभी तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।
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एनआईए प्रवक्ता ने कहा था कि गिरफ्तार आरोपी रमीस केटी के साथ साजिश रचने के मामले में 30 जुलाई को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें एर्नाकुलम के जलाल एएम और मालापुरम के सईद अलवी ई का नाम शामिल है। उन्होंने कहा कि 31 जुलाई को मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें मालापुरम निवासी मोहम्मद शफी पी और अब्दु पीटी शामिल हैं।
प्रवक्ता ने बताया था कि एनआईए ने एक अगस्त को दो और लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एर्नाकुलम निवासी मुहम्मद अली इब्राहिम तथा मुहम्मद अली है। जांच में पता चला कि वे साजिश में शामिल थे और तिरुवनंतपुरम में रमीस केटी से तस्करी किया गया सोना लेने तथा अन्य साजिशकर्ताओं में उसे बांटने में जलाल एएम की मदद कर रहे थे।