केरल के पूर्व माकपा (CPI-M) नेता और अंबालापुझा से विधायक जी सुधाकरण ने राज्य के बुद्धिजीवियों पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के ज्यादातर बुद्धिजीवी राजनीतिक दलों के तलवे चाटने वाले हैं। वे केवल अपने निजी स्वार्थ को पूरा करने में लगे हुए हैं।
राज्य विधानसभा में राज्यपाल के नीतिगत संबोधन पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए सुधाकरण ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केरल के सांस्कृतिक क्षेत्र का स्तर गिर रहा है। उन्होंने युवाओं में बढ़ते नशे के चलन पर भी गहरी चिंता जताई। सुधाकरण के अनुसार, गांजा और चरस के सेवन से राज्य की युवा पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह बर्बाद हो रहा है।
भाषण के दौरान जब सत्ता पक्ष (यूडीएफ) के सदस्यों ने उनकी बातों पर तालियां बजाईं, तो सुधाकरण ने उन्हें बीच में ही रोक दिया। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि वह किसी की वाहवाही लूटने के लिए यह सब नहीं कह रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, मैं एक निर्दलीय विधायक हूं और अपनी बात रख रहा हूं।
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जी सुधाकरण का राजनीतिक सफर काफी चर्चा में रहा है। वह पहले राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले माकपा छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने यूडीएफ के समर्थन से अंबालापुझा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। विधानसभा में उनके इस तीखे बयान ने अब एक नई बहस छेड़ दी है।