मरदू में चार इमारतों की बिजली और पानी की आपूर्ति बृहस्पतिवार को रोक दी गई। उच्चतम न्यायालय ने तटीय नियमों का उल्लंघन करके बनी इन इमारतों को गिराने का आदेश जारी किया है।
बिजली और पानी की आपूर्ति रोके जाने को मानवाधिकार का उल्लंघन बताते हुए प्रदर्शन कर रहे यहां के लोगों ने बताया कि ज्यादा संख्या में पुलिस की मौजूदगी के बीच बिजली आपूर्ति सुबह पांच बजे रोक दी गई और उसके कुछ घंटे के बाद पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी गई।
फोर्ट कोच्चि के सब कलेक्टर स्नेहिल कुमार सिंह ने बुधवार को बताया कि बिजली और पानी की आपूर्ति रोके जाने सहित सरकार द्वारा दिए गए अन्य दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा।
सिंह के पास मरदू निगर निगम के सचिव का भी प्रभार है और उन्हें इमारतें गिराने की जिम्मेदारी दी गई है। उच्चतम न्यायालय ने कुछ दिन पहले केरल सरकार को फटकार लगाई थी कि इमारतों को गिराए जाने के आदेश के बाद भी सरकार इसका पालन नहीं कर रही है।
केरल सरकार ने मंगलवार को बैठक की और केरल राज्य बिजली बोर्ड और केरल जल प्राधिकरण को तत्काल प्रभाव से अपार्टमेंट की बिजली और जल आपूर्ति काटने के लिए पत्र लिखने का निर्णय लिया।
परिसरों के निवासियों ने कहा कि वह अपना फ्लैट खाली नहीं करेंगे और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ अपना प्रदर्शन तेज करेंगे। फ्लैट मालिकों के एक प्रतिनिधि ने बुधवार को कहा कि अधिकारी हमें बाहर फेंकने के लिए कदम उठा रहे हैं। हम दोषी नहीं है। हम अपना घर नहीं छोड़ेंगे। हम यहीं रहेंगे।
वहीं, इस मामले में पुलिस ने तीन बिल्डरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात के लिए सजा) और 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी देने) के तहत एफआईआर दर्ज की है। इन बिल्डरों के 60 से अधिक बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं।