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केरल चुनाव: कौन हैं केके रीमा, जो पिनराई विजयन को बता रहीं हिटलर-मुसोलिनी जैसा निरंकुश शासक

Thu, 01 Apr 2021 06:26 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

  • चुनाव में छाईं गृहिणी की तरह दिखने वालीं रीमा 
  • पति की कर दी गई थी 2012 में हत्या
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केके रीमा, केरल की वडाकरा से यूडीएफ प्रत्याशी - फोटो : Social Media
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विस्तार
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केरल विधानसभा चुनाव- 2021 में केके रीमा छाई हुईं हैं। साधारण वेशभूषा में रहने वालीं रीमा पहली नजर में किसी आम गृहिणी की तरह नजर आती हैं, हालांकि जब वह विनम्र, लेकिन तीखी आवाज में बोलती हैं तो देखने व सुनने वाले दंग रह जाते हैं। वह सीएम पिनराई विजयन को अहंकारी व निरकुंश व हिटलर व मुसोलिनी जैसा शासक बताती हैं। यही खूबी उन्हें केरल में अन्य महिला नेताओं से अलग बनाती है। आइये केके रीमा के बारे में विस्तार से जानते हैं-

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रीमा का कहना है कि उनकी लड़ाई राज्य में राजनीति के नाम पर की जाने वाली बर्बर हत्याओं के खिलाफ है। वह अपने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान सत्तारूढ़ माकपा की कथित हत्या आधारित राजनीति पर निशाना साधती रही हैं। आरएमपी उम्मीदवार ने एक साथ साक्षात्कार में कहा कि उन्हें लोगों से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।

पिनराई में मानवता नहीं
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को 'अहंकारी और निरंकुश' करार देते हुए रीमा ने कहा, 'मुझे लगता है कि वह हिटलर और मुसोलिनी जैसे शासक हैं। उनमें वह मानवता नहीं है जिसकी हम किसी शासक से उम्मीद करते हैं। 
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2016 में हार गई थीं चुनाव
रीमा वर्ष 2016 में वडाकरा सीट से चुनाव हार गई थीं और इस बार चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं थीं, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पार्टी और कांग्रेस नीत यूडीएफ के दबाव में अपना फैसला बदल लिया और माकपा के खिलाफ चुनाव में उतर गईं।

कांग्रेस नीत यूडीएफ की प्रत्याशी, 
दरअसल, रीमा क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी (आरएमपी) के दिवंगत संस्थापक टीपी चंद्रशेखरन की पत्नी हैं। वह केरल के कोझिकोड जिले की वडाकरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं जहां छह अप्रैल को मतदान होगा। उन्हें कांग्रेस नीत यूडीएफ का समर्थन प्राप्त है।

पति की 2012 में हो चुकी है बर्बर हत्या
केरल में राजनीतिक हिंसा की खुद पीड़ित रहीं रीमा के पति की 2012 में हत्या कर दी गई थी जो माकपा से अलग हो गए थे और स्थानीय स्तर पर एक दिग्गज नेता थे। चंद्रशेखरन को लोग टी पी कहकर पुकारते थे। उनकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से उनके शरीर पर धारदार हथियार के 51 निशान मिले थे। इस हत्या को केरल के इतिहास में सबसे बर्बर राजनीतिक हत्याओं में से एक माना जाता है।

टीपी चंद्रशेखरन के 11 हत्यारों को हुई उम्रकैद
वर्ष 2014 में एक स्थानीय अदालत ने टीपी चंद्रशेखरन की हत्या के मामले में 11 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इनमें से तीन माकपा के स्थानीय पदाधिकारी थे।

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