पीएम श्री स्कूल योजना को लेकर केरल सरकार में मचे बवाल के बीच आज मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने सीपीआई के नेताओं से मुलाकात की और तनाव को कम करने की कोशिश की है। बीते दिन शिवनकुट्टी ने कहा था कि पीएम श्री स्कूल योजना का कदम राज्य के लिए केंद्रीय फंड सुरक्षित करने के लिए रणनीतिक था।
केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी शनिवार को सीपीआई के राज्य मुख्यालय गए और वहां राज्य सचिव बिनॉय विश्वाम से मुलाकात की। इस मुलाकात का उद्देश्य पीएम श्री (प्रधान मंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया) योजना को लेकर दो एलडीएफ घटक दलों के बीच पैदा हुए तनाव को कम करना था। दरअसल, सीपीआई को इस योजना पर आपत्ति है क्योंकि उनका मानना है कि इसके जरिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को राज्य में लागू करने का रास्ता खुल सकता है। वाम मोर्चा लंबे समय से एनईपी के खिलाफ रहा है।
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मंत्री शिवनकुट्टी के खिलाफ सीपीआई-कांग्रेस का प्रदर्शन
तिरुवनंतपुरम में सीपीआई के छात्र एवं युवा संगठन एआईएसएफ और एआईवाईएफ के साथ-साथ कांग्रेस के केएसयू ने पीएम श्री योजना पर हस्ताक्षर के विरोध में केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी के कार्यालय तक मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
करीब एक घंटे तक चली नेता के बीच बैठक
मंत्री शिवनकुट्टी ने बताया कि उन्होंने कॉमरेड विश्वाम से पीएम श्री मुद्दे पर चर्चा की। इस मुलाकात में सीपीआई मंत्री जी.आर. अनिल भी मौजूद रहे। इस बैठक करीब एक घंटे तक चली। इस बैठक के बाद मंत्री शिवनकुट्टी ने पत्रकारों से कहा, 'हमने पीएम श्री समझौता को लेकर चर्चा की। सभी मुद्दों का समाधान निकाला जाएगा।'
बैठक में सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा
इसके बाद मंत्री अनिल ने कहा कि बैठक में सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि आगे और भी वार्ता होगी। उन्होंने आगे कहा कि, 'एक व्यक्तिगत चर्चा से मुद्दे खत्म नहीं होंगे। हम उन लोगों से मिलते हैं जो पार्टी कार्यालय आते हैं।' यह बैठक ऐसे समय में हुई जब शुक्रवार को विश्वम ने कहा था कि सीपीआई और अन्य एलडीएफ घटक दलों को समझौते पर पहले से जानकारी नहीं दी गई थी, जिसे उन्होंने फ्रंट की सामूहिक अनुशासनहीनता बताया।
भाकपा का आरोप और माकपा की सफाई
बता दें कि, पीएम श्री स्कूल योजना को लेकर सीपीआई का कहना है कि इस फैसले में उन्हें और एलडीएफ के अन्य दलों को जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने इसे गठबंधन के नियमों की अवहेलना बताया। वहीं सीपीआई (एम) ने कहा कि फंड लेना ठीक है, लेकिन योजना की सख्त शर्तें स्वीकार नहीं की जाएंगी।