मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)के नेता सेइथलावी मजीद
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केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)के नेता सेइथलावी मजीद और विपक्षी गठबंधन यूडीएफ के घटक आईयूएमएल के नेता शिहाबुद्दीन निकाय चुनाव नतीजों को लेकर की गई अपनी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों की वजह से विवादों में घिर गए हैं। हाल में संपन्न निकाय चुनाव में पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए मजीद ने कथित तौर पर महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। वहीं, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के पूर्व नगर पार्षद शिहाबुद्दीन ने कथित तौर पर धमकियां दी हैं।
कार्यकर्ताओं के बीच दिया विवाद बयान
एक वीडियो में मजीद ने एक गाड़ी के ऊपर खड़े होकर उत्साहित पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कथित तौर पर आईयूएमएल पर महिलाओं का इस्तेमाल करके उन्हें हराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। वीडियो में दिख रहा है कि जब वह ये टिप्पणियां कर रहे हैं तो भीड़ उनका उत्साह बढ़ा रही है। सैयद अली रविवार शाम को नगर निकाय चुनाव में जीत के बाद मलप्पुरम जिले के थेंनाला में सभा को संबोधित कर रहे थे।
मजीद ने मल्लापुरम जिले में नगर निकाय चुनाव में जीत के जश्न के दौरान महिलाओं को लेकर कहा था कि एक वोट पाने या एक वार्ड जीतने के लिए महिलाओं को दूसरे पुरुषों के सामने परेड नहीं कराया जाता। महिलाएं अपने पति के साथ सोने के लिए और बच्चे पैदा करने के लिए होती हैं।
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उन्होंने जब यह विवादित टिप्पणी की, तब सभा में महिला कार्यकर्ता भी थीं। सैयद अली मजीद ने अपनी ही पार्टी की महिलाओं को लेकर भी आपत्तिजनक बयान दिया। उन्होंने कहा, हमारे घरों में भी शादीशुदा महिलाएं हैं, लेकिन उन्हें वोट के लिए दिखाने के लिए नहीं। उन्हें घर पर ही रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इसी वजह से परिवार शादी से पहले खानदान और पृष्ठभूमि की जांच करते हैं। सैयद अली मजीद ने पिछले हफ्ते हुए नगर निकाय चुनाव में 47 वोट से जीत दर्ज की है। उनके बयान की काफी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर कई लोग माकपा से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं।
विपक्ष ने साधा निशाना
माकपा नेता के बयान पर भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा, मैंने सीपीएम नेता की बातें नहीं सुनी हैं, लेकिन अगर उन्होंने जो कहा है वह सच है, तो यह बहुत निंदनीय है और मैं इसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूं। महिलाएं भी हमारे देश की संस्कृति का उतना ही हिस्सा हैं जितने पुरुष... यह कम्युनिस्ट सोच है। देश की पहली नागरिक एक महिला हैं... मैं इसकी निंदा करता हूं। मैं निश्चित रूप से कहूंगा कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।