केरल की एक अदालत ने शुक्रवार को 2017 में अभिनेत्री के यौन उत्पीड़न के मुख्य आरोपी पल्सर सुनी और पांच अन्य को कठोर कारावास की सजा सुनाई। एर्नाकुलम जिला और सत्र अदालत की जज हनी एम वर्गीस ने 8 दिसंबर को दोषसिद्धि के बाद ये फैसला सुनाया। इस मामले में एक अन्य आरोपी मलयालम अभिनेता दिलीप को बरी कर दिया गया था।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक दोषी ठहराए गए लोगों में सुनील एनएस उर्फ पल्सर सुनी, मार्टिन एंटनी, मणिकंदन बी, विजयेश वीपी, सलीम एच उर्फ वदिवल सलीम और प्रदीप शामिल हैं। अदालत ने सजा का एलान करते हुए यौन उत्पीड़न के अपराध के लिए सभी को बीस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
क्या था पूरा मामला?
फरवरी 2017 में अभिनेत्री एक फिल्म की शूटिंग के लिए जा रही थीं। इसी दौरान कुछ लोगों ने चलती गाड़ी में उनका अपहरण कर लिया था। अभिनेत्री का यौन उत्पीड़न किया गया और हमलावरों ने इस घटना का वीडियो भी बनाया। घटना के अगले ही दिन गाड़ी के चालक मार्टिन एंटनी को गिरफ्तार कर लिया गया था। एक हफ्ते के अंदर ही हिस्ट्रीशीटर सुनील एनएस उर्फ पल्सर सुनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में सुनी को मुख्य आरोपी बनाया गया था। एक महीने के अंदर ही चार अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर आरोपी बनाया गया था।
मलयालम अभिनेता दिलीप को अदालत ने किया बरी
मलयालम अभिनेता दिलीप को जुलाई, 2017 में कथित तौर पर बलात्कार की साजिश रचने और उसे अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि पीड़िता अभिनेत्री ने उसकी तत्कालीन पत्नी को उसके विवाहेतर संबंधों के बारे में बता दिया था। हालांकि, इस मामले में बीती 8 दिसंबर को अदालत ने अभिनेता दिलीप को सभी आरोपों से बरी कर दिया। वहीं, पल्सर सुनी, मार्टिन एंटनी, मणिकंदन बी, विजयेश वीपी, वदिवल सलीम और प्रदीप को दोषी ठहराया।
किन धाराओं में साबित हुआ अपराध?
इन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 342 (गलत तरीके से कैद करना), 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए बल का प्रयोग), 366 (अपहरण), 354बी (महिला को निर्वस्त्र करने के लिए बल का प्रयोग), 357 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करने के लिए आपराधिक बल का प्रयोग) और 376डी (सामूहिक यौन उत्पीड़न) के तहत अपराधों का दोषी पाया गया।
सभी छह आरोपियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ई (किसी व्यक्ति के निजी अंग की छवि को उसकी सहमति के बिना कैप्चर करना, प्रकाशित करना या प्रसारित करना) और 67ए (यौन रूप से स्पष्ट कृत्यों वाली सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करना या प्रसारित करना) के तहत यौन उत्पीड़न की वीडियो रिकॉर्डिंग करने के अपराध में साजिश रचने का भी दोषी पाया गया। हालांकि, अदालत ने केवल सुनी को ही इन दोनों धाराओं के तहत सीधे तौर पर दोषी पाया।
दोषियों ने अदालत से की नरमी बरतने की अपील
सजा सुनाने की सुनवाई के दौरान सुनी ने अदालत को बताया कि वह अपनी बुजुर्ग मां की देखभाल करने वाला एकमात्र व्यक्ति है और उसने इसी आधार पर नरमी बरतने की गुहार लगाई। एंटनी ने कहा कि उसने अपराध में कोई भूमिका नहीं निभाई थी, लेकिन वह पहले ही कई साल जेल में बिता चुका था। उसने यह भी कहा कि उसके माता-पिता उस पर निर्भर थे।
मणिकंदन ने कहा कि वह इस साजिश का हिस्सा नहीं थे, उनकी पत्नी और बच्चे परिवार के भरण-पोषण के लिए उन पर निर्भर हैं। विजीश ने अदालत से केवल नरमी बरतने की गुहार लगाई और अनुरोध किया कि उसे उसके गृहनगर के पास की किसी जेल में भेजा जाए। वहीं, वदिवल सलीम और प्रदीप ने दावा किया कि वे निर्दोष हैं।
अन्य वीडियो